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देर रात तक गूंजी शहनाइयां

Sat, 25 Jul 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
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सहालग के अंतिम पर्व भड़रिया नौवीं पर शनिवार को वैवाहिक आयोजनों की धूम रही। जिले में सैकड़ों शादियां संपन्न हुई। देर रात तक शहनाईयां गूंजती रहीं। शहर से गांव तक आतिशबाजी, बैंडबाजों का शोर गूंजता रहा। शहर के अधिकांश मैरिज होम, धर्मशाला, गेस्ट हाउस आदि बुक थे। जिले में तीन सौ से ज्यादा शादियां हुईं।  
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शनिवार का दिन शुभ आयोजनों के नाम रहा। सुबह से ही सड़कों पर भीड़ रही। वहीं बाजार खचाखच दिखाई दिए। महिला बाजारों में मेले जैसा माहौल था। ब्यूटी पार्लर पर दिन भर वेटिंग रही। आभूषण, वस्त्र बाजार भी गुलजार रहे। शाम से शुरू हुआ धूम धड़ाका देर रात तक जारी रहा। प्रमुख मार्गों पर बारातों की भीड़ रही। कई स्थानों पर इसके चलते जाम रहा, तो मैरिज होम की अधिकता वाले मार्गों पर भी शोरगुल एवं भीड़भाड़ रही।
पंडितों के अनुसार भड़रिया नवमी की अंतिम सहालग के बाद वैवाहिक आयोजनों की रफ्तार थम जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं के शयन के चलते देवोत्थान एकादशी तक शादी विवाह और अन्य शुभ आयोजन नहीं होंगे।
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अंतिम सहालग के चलते शनिवार का बाजार अच्छा रहा। सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ रही। महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। महिला बाजार देर रात तक खचाखच रहा।
- दिलशाद सिददीकी, बाबूगंज
 
बसों की रही किल्लत
जिले में संपन्न हुए आयोजनों को लेकर बैंड, लाइट, फूल, हलवाई एवं कैटरर्स की व्यस्तता रही। इस दिन बारात आदि के चलते बसों एवं अन्य छोटे वाहनों की भी किल्लत रही। अन्य दिनों की तुलना में दो गुने रेट पर कार व टेक्सियां ली गईं।
 
फूलों के मिले कम आर्डर
डेकोरेटर्स दिनेश का कहना है कि बदले मौसम बारिश आदि के चलते आयोजक सजावट पर अधिक खर्च नहीं कर रहे। बेलून और फूलों का डेकोरेशन का भी अन्य दिनों की तुलना में कम आर्डर मिला।
 
भड्डरी नवमी के बाद बंद हुए आयोजन 15 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से पुन:शुरू होंगे। 15 दिसंबर से शुरू होने वाले मलमास के चलते एक मायह के लिए पुन: शुभ आयोजन रुक जाएंगे। और सहालगें 15 जनवरी से शुरू होंगे।
- ब्रहमर्षि डॉ सुधांशु निर्भय, ज्योतिषाचार्य
 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार को देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु शयन के लिए चले जाते हैं। और वे देव प्रबोधनी या देवोत्थान एकादशी को जागते हैं। ऐसे में इस दौरान वैवाहिक आयोजना एवं अन्य शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।
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- पंडित धीरेंद्र झा, मुख्य महंत श्री कैलाश महादेव मंदिर
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