प्रकाश पर्व दिवाली आज मनाई जाएगी। इस मौके पर लोग गणेश और लक्ष्मी का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। वहीं पटाखे और आतिशबाजी चलाकर धूम-धड़ाका किया जाएगा। शनिवार को पूरे दिन घरों में पर्व को लेकर तैयारियां चलती रहीं। वहीं बाजारों में भी भीड़-भाड़ नजर आई।
दीपोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शनिवार को भी बाजारों में दिनभर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती रही। धनतेरस पर आधी रात तक खुलीं दुकानें शनिवार सुबह से ही गुलजार हो गईं। आभूषण की दुकानों पर भी दिनभर खासी भीड़ नजर आई। वहीं, छोटी दिवाली को लेकर अन्य सामानों की भी बिक्री बढ़ गई। खाद्य सामग्री, मिष्ठान, खील बताशे, विद्युत सामान आदि की दुकानों पर भीड़ उमड़ी। वहीं, छोटी दीपावली की शाम से घरों पर चाइनीज झालरों की रंगबिरंगी चमक देखने को मिली। प्रतिष्ठानों और इमारतों को झालरों से सजाकर रोशन किया गया। इसके अलावा घरों में महिलाएं दीपावली की तैयारियों में व्यस्त रहीं।
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बाजारों में मिट्टी के दीपकों की जमकर बिक्री होने से कुंभकारों के चेहरे खिल गए हैं। कुंभकारों ने कहा कि दशक में पहली बार लोगों में मिट्टी के दीये जलाने को लेकर उत्साह है। अन्यथा लोग केवल पूजन के दिए खरीदते थे। पर्व पर आकर्षक पोशाक वाले गणेश लक्ष्मी पहली पसंद बने हैं। मूर्ति विक्रेता जितेंद्र ने कहा मिट्टी की मूर्तियों की मांग है। कोलकाता और लखनऊ की पोशाक वाली मूर्तियां भा रही हैं।
शहर में मिष्ठान की दुकानों पर दिनभर भीड़ लगी रही। मांग के चलते दुकानदार दिनभर व्यस्त रहे। जिले में चार करोड़ से अधिक मिठाई बिकने की उम्मीद है। बाजार में रंगीन कागज, मोती, रेशम, गोटे वाली मालाएं खूब बिकीं। गिफ्ट कलेक्शन पर गणेश लक्ष्मी, घरेलू साज-सज्जा के फूल माला, मोती लड़ी, ऐटिंक वर्क वाले बंधनवार, कंडील, गुलदस्ते, शोपीस, वॉल हैंगिंग्स ग्राहकों के आकर्षण का केंद्र रहे। बढ़ी मांग से खील के दाम चढ़ शनिवार को 60 से 80 रुपये किलो तक पहुंच गए। विक्रेता संतोष सक्सेना ने कहा धान की कम फसल के चलते इस बार खील की आपूर्ति बाहर से हुई। महंगी होने के बाद भी इस बार खील की मांग खूब रही।
पर्व पर स्थिर लग्न में माता महालक्ष्मी का पूजन ज्यादा शुभ माना जाता है। पंडित अरुण कुमार उपाध्याय ने कहा कि स्थिर लग्न में अपने घर पर माता महालक्ष्मी की चौकी लगाकर उस पर लक्ष्मी गणेश कुबेर देवताओं की मूर्तियां रख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैंठे। अपने बायीं ओर जल का पात्र, घंटी, धूपबत्ती, तेल का दीपक रखें। दाहिनी ओर घी का दीपक, जल से भरा शंख, घिसा चंदन, रोली, कलावा, पुष्प, अक्षत, फल, मिठाई रखें। स्वयं को पवित्र कर देवी देवताओं के पूजन का संकल्प कर सहज पूजा करें। संध्याकाल को घर और व्यवसाय स्थल पर पूजन और दीप मालिका करें। संभव हो तो रात में जागरण कर भजन गाकर माता महालक्ष्मी के आगमन की प्रार्थना करें।
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ये है पूजन का शुभ समय
सुबह 7.56 से 10.12 बजे तक
दोपहर 12.03 से शाम 3.29 तक
शाम 6.38 से रात 8.33 बजे तक
महानिशा में रात 1.06 से सुबह 3.22 तक