सकीट। क्षेत्र से गुजरी काक नदी की तीन वर्ष से सफाई नहीं हो सकी है। सफाई न होने से 52 किमी लंबाई में फैली नदी में बबूल के पेड़, कंटीली झाड़ियां खड़ी हैं। नदी में जमा पानी काला हो चुका है जिससे तेज दुर्गंध उठती है। विषैली दुर्गंध से नदी किनारे बसे गांव के लोगों का जीना दुश्वार हो गया है।
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि शहर की सीवर का बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी काक नदी में छोड़े जाने से समस्या पैदा हुई है। सीवर का काला विषैला पानी उपजाऊ जमीन को प्रभावित कर रहा है। काक नदी मारहरा ब्लॉक क्षेत्र के नयाबांस गांव से शुरू होती है जो गिरौरा, शीतलपुर, कुसाड़ी से सकीट क्षेत्र से गुजरती हुई मैनपुरी जिले की सीमा पर ईसन नदी से जुड़ती है। सीवर का गंदा पानी काक नदी में गिरने के बाद से ग्रामीण परेशान हैं।
पहले काक नदी का पानी साफ था सीवर का गंदा पानी छोड़े जाने से काला और विषैला हो गया। पहले इससे खेतों की सिंचाई की जाती थी लेकिन अब हानिकारक बन गया है। किनारे बबूल और कंटीली झाड़ियां खड़ी हैं। -जगतसिंह, सकीट
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काक नदी का पानी इतना विषैला है कि किसी के भी उसमें गिरने का डर रहता है। तेज दुर्गंध से क्षेत्र में संक्रमण फैलने की आशंका सता रही है। काक नदी की सफाई कराकर इसमें सीवर का गंदा पानी छोड़ना बंद किया जाना चाहिए। -नंदकिशोर, सकीट
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काक नदी की सफाई कराने की जिम्मेेेेेेदारी सिंचाई विभाग की है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर काक नदी की सफाई कराई जाएगी। - उमेश चंद्र अग्रवाल, बीडीओ
जगत सिंह