जिले में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत उपभोक्ताओं के नि:शुल्क खाते खोलने की एवज में बैंक कर्मचारियों द्वारा की जा रही अवैध वसूली व भ्रष्टाचार को लेकर की गई शिकायत पर केंद्रीय सतर्कता आयोग दिल्ली गंभीर हुआ है। आयुक्त ने मामले की जांच के मुख्य सतर्कता अधिकारी को आदेश दिए हैं, जो किसी भी दिन एटा आकर इस मामले की जांच करेंगे। इस कार्रवाई से संबंधित बैंक कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। बता दें कि यह शिकायत ब्लॉक जैथरा के लगभग 17 लोगों ने की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर व्यक्ति का बैंक में खाता हो इसके लिए उन्होंने गत 15 अगस्त को प्रधानमंत्री जनधन योजना लागू की थी। इसके तहत प्रत्येक परिवार के दो सदस्यों का बैंक में खाता खुलना अनिवार्य है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। इसी के तहत जिले में भी लोगों के खाते विभिन्न बैंकों द्वारा खोले जा रहे हैं, लेकिन लोगों की शिकायत है कि इन खातों को खोलने के नाम पर संबंधित बैंक कर्मचारी व ग्राहक सेवा केंद्र के कर्मचारी खुली लूट कर रहे हैं। इस संबंध में गत 20 नवंबर 2014 को जैथरा के आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार सहित 17 लोगों ने शिकायत भारतीय स्टेट बैंक नई दिल्ली के महाप्रबंधक से की थी। इसकी कापी पीएमओ, केंद्रीय सतर्कता आयोग के आयुक्त, वित्त मंत्री सहित अन्य अधिकारियों को भेजी थी।
शिकायत में आरोप लगाया था कि वित्त मंत्रालय और अन्य सक्षम संस्थान के आदेश के बाद भी स्थानीय बैंक के शाखा प्रबंधक प्रधानमंत्री जनधन योजना के खाते अपनी शाखा में न खोलकर कस्बा के तीन किलोमीटर दूर धरौली स्थित एसबीआई के ग्राहक सेवा केंद्र पर भेज रहे हैं जो गांव बहगों के नाम से संचालित है। कस्बा से दूर केंद्र होने के चलते लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। साथ ही बैंक के शाखा प्रबंधक कुछ विशेष व्यक्तियों जिनकी पहचान सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से की जा सकती है के माध्यम से ही बैंक ऋण केसीसी आदि स्वीकृत करते हैं। साथ ही उपभोक्ता से अभद्रता व्यवहार भी किया जाता है। पत्र में इस मामले से संबंधित 13 बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया था, जिसमें आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग भी शामिल थी।
इस मामले को केंद्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली ने गंभीरता से लिया है। आयोग के अनुभाग अधिकारी सुनेजा जर्नादन ने मामले की जांच मुख्य सतर्कता अधिकारी को सौंपी है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच व आवश्यक कार्रवाई कर रिपोर्ट जल्द से जल्द से सौंपें।
जिसकी शिकायत उसी को जांच
बताते हैं कि बैंक के उच्चाधिकारियों की इस मामले में शुरूआत से ही लापरवाही नजर आती रही। करीब 17 लोगों की शिकायत के बाद भी बैंक के किसी भी उच्चाधिकारी ने धरातल पर जांच करने की जहमत नहीं उठाई। बल्कि मामले की जांच उसी शाखा प्रबंधक को सौंप दी, जिसकी शिकायत की गई थी। इस पर पुन: शिकायत, शिकायतकर्ताओं ने आयोग से की। इधर, जांच के आदेश होने पर संबंधित बैंक कर्मचारियों में हड़कंप मचा है।