वाहनों का बढ़ता दबाव प्रदूषण में इजाफा कर रहा है। जिले मेें हर साल बढ़ते तीन हजार से ज्यादा वाहनों ने प्रदूषण दोगुना किया है। वाहनों से निकलने वाला धुआं धुंध की वजह बन रहा है। शहर के हर कोने पर सुलग रहे कूड़े के ढेर भी प्रदूषण में इजाफा कर रहे हैं। प्रशासन भी अब तक प्रदूषण को लेकर नहीं चेता है।
जिले में बढ़ते प्रदूषण ने पर्यावरण का हाल बेहाल किया है। मौजूदा समय में जिले की सड़कों पर 1,51,265 वाहन दौड़ रहे हैं। इनमें 1,27,782 पेट्रोल और 23,483 डीजल से चलते हैं। समय-समय पर वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण जांच कराना अनिवार्य है, लेकिन जिले में वाहन चालक इसे लेकर संजीदा नहीं हैं। विभाग में इसे लेकर कोई अभियान चलाता है और न ही कोई कार्रवाई हो रही। शहर में जैसे-जैसे वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति बनती है। जाम के दौरान स्टार्ट वाहन धुआं छोड़ते हैं। शहर में जगह-जगह कूड़ों को जलाने से उठने वाला धुआं भी प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका अदा कर रहा है। हाईवे पर रेलवे पुल के किनारे ही लगे कूड़े के ढेर से जहरीला धुआं हर वक्त उड़ता है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप रघुनंदन कहते हैं कि वाहनों से बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए घातक है। लोगों को इससे बचाव करने की जरूरत है।
-----------------
यह है वाहनों की स्थिति
वर्ष 2016 में अब तक बढ़े पेट्रोल वाहन- 002300
वर्ष 2016 में अब तक बढ़े डीजल वाहन- 000700
----------------
कम होने लगी धुंध
मंगलवार को जिले में धुुंध का असर कम होता नजर आया। तेज हवाएं चलने से लोगों को ठंड का अहसास हुआ। मगर सुरक्षा के लिहाज से लोग घर से मास्क पहनकर ही निकले। इसके साथ ही अस्पताल में भी मरीजों की कतारें लगी रहीं। जिनमें अस्थमा, सर्दी, खांसी और जुकाम के मरीजों की अधिकता रही।
------------
अधिकारी बोले
हर साल तीन हजार से ज्यादा वाहन बढ़ जाते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ता है। इसके लिए समय-समय पर वाहनों की प्रदूषण की जांच कराई जाती है।
आरसी भारतीय, एआरटीओ प्रशासन