परिवहन विभाग भले ही यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे
करता हो, लेकिन सच्चाई इससे उलट है। यात्रियों से पूरा किराया वसूला जा रहा
है। सुविधाओं के नाम पर उन्हें ठेंगा दिखाया जा रहा है। रोडवेज में कई
बसें पिछले कुछ समय से जर्जर हैं। जो आए दिन कहीं न कहीं खराब होकर खड़ी हो
जाती हैं।
डिपो में संचालित बसों की हालात काफी खस्ता है। 68 बसें डिपो से
संचालित होती हैं। इनमें से नौ बसें तो नौ लाख किलो मीटर तक चल चुकी हैं।
25 बस पांच लाख किलो मीटर से अधिक का सफर तय कर चुकी हैं। बसों के रखरखाव
पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। रोडवेज बसों से हर रोज हजारों की संख्या
में यात्री यात्रा करते हैं। ये बसे दिल्ली, अलीगढ़, आगरा, बरेली आदि
प्रमुख रूटों पर दौड़ती हैं। बसों की जर्जर हालात यात्रियों की सारी उम्मीद
पर पानी फेर देती है। बसें आए दिन तकनीकी खराबी के चलते बीच रास्ते में
खड़ी हो जाती हैं।
इससे यात्रियों को घंटो तक खडे़ होकर उन्हें ठीक होने तक
इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो ऐसा होता है कि बसों में बड़ी खराबी होने
के कारण उसी रूट की दूसरी बस से यात्रा करनी पड़ती है। वहीं डिपो में कई
बसें तो ऐसी हैं भी जो धक्का लगाने से स्टार्ट होती हैं। रास्ते में खराबी
आने पर ऐसी बसों में यात्रियों को ही धक्का लगाना पड़ता है। इससे यात्रियों
को समय की बर्बादी के साथ परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
जो
बसें अपने निर्धारित मानक को पूरा कर चुकी हैं। उनको शीघ्र ही रोडवेज के
वेडे से हटाया जाएगा। ऐसी बसों की प्रस्तावित सूची मुख्यालय को भेज दी गई
है। - विनोद कुमार यादव, सीनियर फोरमैन