देवोत्थान एकादशी का पर्व शुक्रवार को जिले में परंपरागत रूप से मनाया गया। गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद अर्पित करके घरों में देवों की पूजा की गई। श्री हरि के जागने के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो गए। इसी के साथ शहनाइयां गूंजने लगी हैं। पर, सहालग की भीड़ से यातायात व्यवस्था चरमरा उठी।
देवोत्थान पर्व को लेकर बाजारों में शुक्रवार को रौनक रही। हालांकि 500, एक हजार रूपये के नोट बंद किए जाने का असर ने लोगों के उत्साह कम कर दिया था। फिर भी आस्था से जुड़े त्योहार को लेकर लोगों ने बाजार आकर गन्ना, शकरकंद, सिंघाड़ा आदि की खरीददारी की। शाम को घरों के आंगन में दैवीय कलाकृतियां बनाकर जागो देव के उद्घोष के साथ देवी-देवताओं का आह्वान किया। नई फसल का भोग लगाकर श्री हरि की पूजा की।
एक दूजे के बने सैकड़ों जोड़े
देवोत्थान पर्व के साथ शादियां भी शुरू हो गई हैं। शुक्रवार को ही सैकड़ों युवक-युवती परिणय सूत्र में बंधे। देर रात तक शादी समारोह की धूम मची रही। सहालग का असर सड़क और बाजारों में भी दिखा। दिनभर जहां बाजार में खरीदारी की भीड़ दिखी। वहीं शाम होते ही विवाह स्थल रोशनी से सराबोर हो उठे। बैंडबाजों के साथ शहनाई की धुन सुनाई देने लगी।
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जाम ने बढ़ाई परेशानी
शादी समारोहों के कारण उमड़ी भीड़ से हाईवे पर शाम से ही जाम के हालात बने रहे। वाहनों का दवाब बढ़ जाने से जीटी रोड के साथ संपर्क मार्ग से भी लोगों का आवागमन मुश्किल भरा रहा।