एटा। मेडिकल कॉलेज से ज्यादा प्रसव बीते वित्तीय वर्ष में जलेसर सीएचसी पर हुए हैं। जबकि वहां मेडिकल कॉलेज के मुकाबले सीएचसी पर बेहतर सुविधाएं नहीं हैं। यह बात हम नहीं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बता रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में मेडिकल कॉलेज में 2865 प्रसव हुए। जबकि जलेसर सीएचसी पर 3338 प्रसव हुए हैं। यह एक बड़ा सवाल भी है कि जहां सुविधाएं नहीं हैं वहां लोग भरोसा करके जा रहे हैं और जहां संसाधन हैं, वहां सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं।
मेडिकल कॉलेज का नाम सुनते ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का मन में ख्याल आ जाता है कि यहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। मरीजों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी, लेकिन इसकी हकीकत कुछ और ही है। यहां प्रसव के लिए गर्भवती महिलाएं भरोसा नहीं कर पा रही हैं। इसके चलते कॉलेज में प्रसव कम संख्या में हो रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो बीते वित्तीय वर्ष में कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में 3349 गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए पहुंची। यहां 2865 के प्रसव कराए गए। जबकि 484 गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर पर रेफर किया गया।
कॉलेज में बीते वित्तीय वर्ष में 313 बड़े ऑपरेशन से प्रसव हुए। जबकि छोटे ऑपरेशन से 891 प्रसव कराए गए। इस दौरान 1661 प्रसव सामान्य रूप से हुए। जबकि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में एचओडी सहित 7 चिकित्सकों का स्टाफ है। बात जलेसर सीएचसी की करें तो वहां बीते वित्तीय वर्ष में 3338 प्रसव हुए हैं। यानि मेडिकल कॉलेज से 473 प्रसव अधिक हुए हैं।
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धनराशि भी नहीं हो पाई खर्च
बीते वित्तीय वर्ष में जननी सुरक्षा योजना के तहत मेडिकल कॉलेज को 40 लाख 60 हजार रुपये मिले थे, लेकिन यहां प्रसव कम होने से 1596800 रुपये वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण सरेंडर करने पड़े। जबकि 2463200 रुपये खर्च हुए थे।
मेडिकल कॉलेज में जो भी गर्भवती प्रसव के लिए आती हैं। उसका प्रसव कराया जाता है। गंभीर स्थिति में ही गर्भवती को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। जननी सुरक्षा योजना के तहत धनराशि वापस गई वह इस वर्ष आने वाली धनराशि में जुड़कर मिल जाएगी। मरीजों को कॉलेज में बेहतर सुविधाएं दी जा रहीं हैं। -डॉ. रजनी पटेल, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज