मानसून की पहली बारिश के बाद ही जिले में सड़कों की तस्वीर बदल गई है। करोड़ों खर्च के बाद बनी इन सड़कों की बारिश ने पोल खोल दी। पहली बरसात ने पोल खोल दी है। बदहाल सड़कों से गुजरते समय वाहन चालकों के साथ-साथ आम लोगों को भी मुसीबत उठानी पड़ रही है। बदहाल जीटी रोड और अन्य मार्गों के चलते रोडवेज विभाग को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बरसात के बाद गहरे-गहरे गड्ढे बदहाल सड़कों की तस्वीर पेश कर रहे हैं। सड़कें बदहाल इतनी हैं कि इनसे अब हर किसी को परेशान होना पड़ रहा है। गड्ढों की वजह से दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। इधर, वाहनों की रफ्तार भी धीमी हो गई है। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय भी लग रहा है। सड़कों से उड़ रही स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। धूल के साथ उड़ रही छोटी कंकड़ी आंखों को भी नुकसान पहुंचा रही है। ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले भी खासे परेशान हैं। जीटी रोड खराब होने की वजह से इस रोड पर माल ढोने के लिए गाड़ियां नहीं आ रही हैं। जिसके चलते आने वाले दिनों में व्यापार भी खासा प्रभावित होने की उम्मीद की जा रही है।
तारकोल की जगह काला तेल कर रहे इस्तेमाल
नेशनल हाईवे, पीडब्ल्यूडी और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के विभागों से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो सड़क बनाने वाले ठेकेदारों द्वारा मानकों के विपरीत सड़क का निर्माण करने पर ऐसी स्थिति हो जाती है। राजनीतिक दबाव के चलते सड़कों को विभागों की ओर से ओके कर दिया जाता है। लिंक रोड और अन्य मार्गों पर ठेकेदारों को मानकों के अनुसार करीब 8200 सौ किलो तारकोल लगाना होता है, लेकिन, संबंधित ठेकेदार इसकी बचत कर लाखों रुपये बचा लेते हैं। वहीं कुछ ठेकेदार तो तारकोल की जगह काले तेल से ही सड़कें बना देते हैं, जिनकी बरसात के बाद हालत बद से बत्तर हो जाती है। इसके चलते ही जिले की सड़कों की यह हालत है।
बरसात के बाद इन मार्गों पर हुआ निकलना दूभर
जीटी रोड, शिकोहाबाद रोड, गंज रोड, शहर का रेलवे रोड सहित गांव देहात की नई बनी सड़कें भी बदहाल हो चुकी हैं।
खराब सड़कों की वजह से प्रतिदिन डीजल एवरेज पर 50 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा कमानी और आदि पुर्जे भी खराब हो रहे हैं। जिससे विभाग को हर दिन लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एआरएम, संजीव यादव