कुपोषण को लेकर सरकार चिंतित है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार
ग्राम पंचायत स्तर पर कई योजनाएं भी संचालित कर रही है, लेकिन इन योजनाओं
पर प्रधानों की लापरवाही भारी पड़ रही है। प्रशासन द्वारा योजना के संबंध
में कई बार प्रधानों को जागरूक किया गया। बावजूद इनकी मनमानी योजनाओं को
सफल नहीं बनने दे रही हैं। इन सब से अजीज आकर अब पंचायती राज विभाग ने पोषण
संबंधी योजनाओं को सफल बनाने के लिए कमर कस ली है, और संबंधित ग्राम
प्रधानों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से दूर रखने के लिए शासन से
ग्राम पंचायतों को एक अंटाइड फंड दिया जाता है। जो ग्राम प्रधान व एएनएम
के ज्वाइंट खाते में आता है। इसके लिए ग्राम पंचायत में ग्राम स्वच्छता,
स्वास्थ्य और पोषण समिति का भी गठन किया जाता है, जिसका अध्यक्ष प्रधान
होता है। बता दें कि उक्त फंड के माध्यम से प्रधान व एएनएम ग्राम पंचायत
में बच्चों को सैरेलेक व बिस्कुट उपलब्ध कराते हैं और बची हुई धनराशि को
स्वच्छता व स्वास्थ्य संबंधी चीजों पर खर्च किया जाता है, लेकिन इसको फंड
को निकालने के लिए ग्राम प्रधान एएनएम का सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसके चलते
यह योजना सफल नहीं हो पा रही है। कुछ माह पूर्व भी प्रधान व एएनएम के बीच
आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए सीएमओ व जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम
पंचायत स्तर पर बैठकें की थीं। बावजूद स्थित जस के तस बनी हुई है। अब
पंचायती राज विभाग ने प्रधान को पत्र द्वारा दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
अंटाइड फंड को निकलकर खर्च करने के संबंध में ग्राम प्रधानों को
निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त
नहीं की जाएगी।
- सुनील कुमार पांडेय, जिला पंचायत राज अधिकारी, एटा।