जैथरा की सीएचसी पर पसरा सन्नाटा
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एटा। जनपद की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, इसके चलते लोगों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सकों के अभाव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित उपकेंद्रों पर मरीज इलाज के लिए तो पहुंचते हैं पर निराश होकर लौट जाते हैं। यहां डॉक्टर न होने पर मरीजों को एटा या फिर यहां से हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। जिले के सीएचसी, पीएचसी और उप केंद्रों पर 137 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में मात्र 62 ही जिले में तैनात हैं। संख्या के हिसाब से स्पष्ट है कि कई उप केंद्र तो बिना चिकित्सकों के ही चल रहे हैं।
जिले की सदर, अलीगंज और जलेसर तहसील में कुल नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 36 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और लगभग 182 उपस्वास्थ्य केंद्र बने हुए हैं। इनमें चिकित्सकों के पदों के सापेक्ष तैनाती नहीं है। वहीं जो डॉक्टर यहां तैनात भी हैं उन्हें इन दिनों कोविड 19 के लिए बनी रेपिड रिस्पांस टीम या अन्य कार्यों में लगा दिया गया है। इसके चलते अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
मात्र एक डॉक्टर के सहारे है महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में 13 पदों के सापेक्ष मात्र एक डॉक्टर की तैनाती है। जबकि गर्भवती महिलाओं के लिहाज से अहम अस्पताल है। गर्भवती महिलाओं की यहां सीजेरियन और नार्मल प्रसव कराया जाता है। यहां भी गंभीर स्थिति में महिलाओं को आगरा रेफर कर दिया जाता है।