एटा। आकस्मिक स्थिति में महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई महिला हेल्पलाइन नंबर को खुद मदद की दरकार है। डीजल का बजट न आने से हेल्पलाइन टीम के वाहन के पहिए पांच माह से थमे हुए हैं। हेल्पलाइन में काम करने वाले कर्मचारियों को छह माह से वेतन नहीं मिला है। महिला हेल्पलाइन का यह हाल तब है। जब प्रदेश में उन्नाव व हैदराबाद जैसी घटनाएं हो रही हैं।
किसी अप्रिय घटना या विषम परिस्थिति में महिलाओं को तत्काल सहायता मिल सके, इसके लिए प्रदेश सरकार के महिला कल्याण विभाग ने हेल्पलाइन सेवा 181 शुरू की थी। आवश्यकता पड़ने पर महिलाएं 181 पर कॉल कर सहायता हासिल कर सकती हैं। पीड़ित महिला तक पहुंचने के लिए 181 सेवा की टीम को एक चौपहिया वाहन दिया गया है। इसमें दो महिला पुलिस कर्मी, सुगमकर्ता व चालक की तैनाती है, लेकिन पिछले पांच माह से डीजल न मिल पाने की वजह से इसके पहिए थमे हुए हैं।
हालांकि शुरुआत में हेल्पलाइन सेवा में तैनात कर्मचारियों ने जोड़ तोड़ कर किसी तरह गाड़ी चलवाने का प्रयास किया पर ज्यादा दिनों तक व्यवस्था को सुचारु नहीं रख पाए। इससे टीम मदद मांगने वाली महिलाओं के पास नहीं पहुंच पा रही है। वहीं हेल्पलाइन में तैनात सभी कर्मचारियों को छह माह से वेतन नहीं मिला है। यह सभी कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर रखे गए हैं।