माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच बर्फ की चट्टान में दबने के बाद भी सियाचिन जीतने वाले जाबांज हनुमंथप्पा जिंदगी की जंग हार गए। जब लोगों को देश के इस जांबाज सिपाही के शहीद होने की खबर पता चली तो लोगों में शोक छा गया। सोशल साइट्स पर देर शाम तक शोक संवेदनाएं लोग देते रहे।
एक कवि ने अपनी पंक्तियों में अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि चली गई सांस लेकर आस फिर जीने की, रास न आई हनुमंथप्पा को तिल-तिल कर जीने की। दमखम था सियाचन से जिंदा लौट आया अब आवाज दी है तो कसम खां लो वहां जीने की। ऐसी एक नहीं कई संवेदनाएं, लोगों ने अपनी पंक्तियों में व्यक्त कर सिपाही को श्रद्धांजलि दी। बजरंग दल के नगर अध्यक्ष आकाश सिंघल ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। सोशल साइट्स पर एक युवक ने विकास सिंह चौहान ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि बहुत लड़े आप मौत से, समूचा भारत आप को अश्रुपूर्ण नमन कर रहा है। भावभीनी श्रद्धांजलि अलविदा शेर ए- हिन्दुस्तान।
शिक्षिका प्रज्ञा ने भी जांबाज सिपाही के शहीद होने पर अपनी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि शहीद सिपाही के अदम्य साहस ने उन्हें 10 दिन बर्फ की चट्टान के अंदर जिंदा रखा, बेसक वह जिदंगी की जंग हार गए हो लेकिन हर भारतीय के अंदर उनका जज्बा और जिदांदिली मिशाल बनकर जिंदा रहेगी।