हजरत इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम पर कसबे में बड़ी अकीदत के साथ ताजिए रखे गए। अकीदतमंद देर रात तक ताजियों के दीदार के लिए तैयारियों में लगे रहे।
कर्बला के मैदान में मजहब ए इस्लाम को बचाने के लिए हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ क्रूर राजा यजीद की सेना से लड़े थे। पूर्व पालिकाध्यक्ष परवेज जुबैरी ने कहा कि जंग में यजीद की सेना ने बेरहमी से हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को शहीद कर दिया। जंग में छह माह के हजरत अली असगर भी शहीद हुए। करबला की जंग के बाद दीने इस्लाम पूरी दुनिया में छा गया। उन्हीं दिनों की याद में हर वर्ष मुहर्रम माह की नौ और दस तारीख को ताजिए रखे और सुपर्द-ए-खाक किए जाते हैं। मंगलवार की रात ताजिए कस्बे के मोहल्ला शीशग्रान, काजी ,पक्का बाग, मोहल्ला कम्बोह ,चूड़ी वाली गली, बड़ा बाजार, तालागढ़, समेत 26 स्थानों पर रखे गए। ताजियों के दीदार के लिए अकीदमंत देर रात तक जागते रहे। घरों में लंगर और फातिहा पढ़ा गया। बुधवार को रंजोगम के साथ ताजियों को पिवारी मार्ग स्थित कर्बला के मैदान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
दरगाह शरीफ में हुआ जिक्र-ए-आजम
मंगलवार की देर रात दरगाह खनकाहे बरकातिया में सैयद शाह बरकतुल्ला साहब के सालाना फातिहा के मौके पर जिक्र शहीद-ए-आजम का आयोजन किया गया। इस दौरान मौजूद उलेमाओं ने हजरत इमाम हुसैन के जीवन पर रोशनी डाली। मौके पर सज्जादानशीन सैयद नजीब हैदर नूरी ,सैयद अमान मियां, कारी रहमतुल्ला, कारी अबरार, कारी कौशल, कारी इरफान आदि मौजूद रहे।
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पुलिस फोर्स रही तैनात
कस्बा में मोहर्रम माह की नौ तारीख को रखे गए ताजिए एवं रावण दहन लेकर दिनभर कस्बे में चौकसी बरती गई। कस्बे में पुलिस फोर्स तैनात रहा है। वहीं अधिकारी भी मोबाइल रहे।