मारहरा कस्बा में एजेंसी पर लगी भीड़। संवाद
एटा/जैथरा/मारहरा। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के असर से गैस की किल्लत बड़ा संकट बनता जा रहा है। गैस एजेंसियों ने भी प्रतिबंध लगा दिया है। 25 दिन बाद घरेलू व कमर्शियल गैस एक बार बुकिंग के दौरान एक ही दिया जा रहा है। ऐसे में कमर्शियल गैस की किल्लत ने रेस्तरां व होटल संचालक परेशान हैं। कस्बों में घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर हालात बेकाबू हो चुकें हैं। कई उपभोक्ता सुबह तड़के से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहे लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी अधिकांश लोगों को सिलिंडर नहीं मिल पाया। सिलिंडर न मिलने से उपभोक्ताओं में मायूसी और नाराजगी दोनों ही देखने को मिली।
कस्बा अवागढ़ क्षेत्र के इंडियन गैस सर्विस केंद्र पर सुबह 7 बजे से ही उपभोक्ताओं की लाइन लगनी शुरू हो गई। ग्रामीण इलाकों से आए उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहे लेकिन सप्लाई कम होने के कारण कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। जिन लोगों को सिलिंडर मिला उन्होंने राहत की सांस ली जबकि अधिकांश उपभोक्ताओं ने वितरण व्यवस्था की खामियों को लेकर रोष जताया। इंडियन गैस सर्विस के ऑफिस मैनेजर अंकित कुमार गुप्ता ने बताया कि ईद व रविवार की छुट्टियों के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। उन्होंने भरोसा दिया कि अगली खेप मिलने पर सभी उपभोक्ताओं को सिलिंडर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
मारहरा कस्बे के नगला परसी स्थित इंडियन गैस एजेंसी पर भी मंगलवार को भारी भीड़ रही। उपभोक्ताओं ने बताया कि कई दिनों से वे गैस सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं। क्षेत्र में एक ही एजेंसी होने के कारण हालात और बिगड़ रहे हैं। पूर्व प्रधान बबलू ठाकुर ने बताया कि उपभोक्ताओं को पहले ई-केवाईसी करानी पड़ती है फिर पर्ची कटवानी होती है और अंत में घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है तब भी सिलिंडर मिलने की गारंटी नहीं है। शादी-विवाह का समय होने के कारण समस्या और गंभीर हो गई है।
जैथरा कस्बे में तो हालात और भी खराब हैं। कुछ दिन पहले तक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध गैस सिलिंडर अचानक गायब हो गए। गैस न मिलने से कई परिवार मजबूरन चूल्हे का सहारा ले रहे हैं। कस्बे के ऋतिक राठौर बताते हैं कि पत्नी को चूल्हे पर खाना बनाना नहीं आता इसलिए वे खुद चूल्हा जलाते हैं और फिर पत्नी किसी तरह रोटी बनाती है। बुजुर्ग महिला ने बताया कि बहू ने कभी चूल्हा नहीं जलाया। गैस न होने से वह रोज बगीचों से सूखी लकड़ी लाकर खाना बनाती हैं। संवाद