एटा। शहर का भूमिगत जल जहरीला होता जा रहा है। हाल में लिए गए तीन नमूनों में टीडीएस की मात्रा करीब 20 गुना ज्यादा निकली है तो नाइट्रेट की मात्रा भी दस गुना ज्यादा पाई गई है। नलकूपों की स्थापना के लिए लिए गए 19 पानी के नमूनों में 13 फेल हो चुके हैं। यहां पानी खारा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया है।
ऐसे में भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई है। कई जगह तो पानी पीने लायक तो छोड़िए अन्य कार्यों में भी इस्तेमाल करने लायक नहीं बचा है। शहर की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने की जल निगम की कोशिशों को फिर झटका लगा है। जीटी रोड स्थित नवीन गल्ला मंडी समिति में तीन नए नलकूप लगाने का प्रस्ताव था।
इन तीनों नलकूप के पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें तीनों ही फेल पाए गए। जल निगम के अधिकारियों के मुताबिक तीनों नमूनों में घुलित ठोस नाइट्रोजन की मात्रा निर्धारित से 10 गुना ज्यादा पाई गई। इसके कारण आगरा की लैब से तीनों नमूनों को फेल कर दिया।
विद्युत यांत्रिक खंड आगरा के अवर अभियंता नागेंद्र कुशवाहा ने बताया कि मंडी समिति में लगाए जाने वाले तीन नलकूप में नाइट्रेट की मात्रा 70 से 80 पीपीएम पाई गई, जबकि मानक के अनुसार नाइट्रेट की मात्रा 45 पीपीएम होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इससे पहले सदर तहसील परिसर में नए दो नलकूप लगाने का प्रस्ताव था।
इसके लिए भूजल के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं मिली। नलकूप के नमूनों में टीडीएस 3035 मिलीग्राम प्रति लीटर निकला था, जबकि यह मात्रा 150 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए।