मिरहची। स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को सशक्त बनाने के लिए कूड़ा प्रबंधन केंद्र की स्थापना कराई गई थी जो बेकार साबित हो रहे है। ब्लॉक क्षेत्र के 90 प्रतिशत आरआरसी पशु बांधने या उपले पाथने के उपयोग में लिए जा रहे हैं। क्षेत्र के अधिकांश आरआरसी पर ताले लटके हैं।
योजना के तहत कूड़ा प्रबंधन केंद्र पर वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद बनाने की योजना थी। योजना के तहत घर-घर जाकर कचरा एकत्र करने के लिए ई-रिक्शा खरीदे गए थे जो पंचायत या ग्राम प्रधान के आवास पर खड़े धूल फांक रहे हैं। प्लास्टिक कचरे को बेचकर होने वाली आय से कर्मचारियों को मानदेय देने और ग्राम पंचायत को मजबूत करने की योजना थी। ब्लॉक क्षेत्र में 52 ग्राम पंचायत हैं, इसमें 40 ग्राम पंचायत पर आरआरसी का निर्माण हो चुका है। निर्माण के बाद से 90 प्रतिशत आरआरसी पर ताले लटके हुए हैं।
केस-1
गांव फालर में कूड़ा प्रबंधन केंद्र पर लटका ताला
ग्राम पंचायत रामई हेतमशाह के गांव फालर में कूड़ा प्रबंधन केंद्र पर ताला लटका हुआ था। कूड़ा कलेक्शन के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा इसमें खड़े धूल फांक रहे हैं। योजना के तहत गांव में एक बार भी कूड़े का एकत्रीकरण नहीं किया गया। कई माह से गांव में सफाई तक नहीं हो सकी है।
केस-2
ग्राम पंचायत रसूलपुर गड़ोली में बांधे जा रहे पशु
ग्राम पंचायत रसूलपुर गड़ोली में कूड़ा प्रबंधन केंद्र पर उपले बनाने के साथ ही पशु बांधे जो रहे हैं। ई-रिक्शा आरसीसी में खड़ा था जो ताले में बंद है। योजना के शुरुआत में कुछ दिन कूड़ा घर-घर से एकत्रित किया गया बाद में बंद कर दिया गया।
केस -3
कूड़ा घर बंद होने से परेशानी
ग्राम पंचायत गोबरा में कूड़ा घर बंद होने के कारण गांव के लोगों को रोजगार नहीं मिल सका। निर्माण के समय लोगों को जैविक खाद बनने पर जैविक फसल की आस थी जो लटकी हुई है।
कूड़ा प्रबंधन केंद्र पर लटके तालों की जांच कराई जाएगी। आरआरसी क्यों बंद हैं सभी केंद्रों की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -सुधाकर दुबे, बीडीओ मारहरा
रसूलपुर गढौली में बंद पड़ा आरआरसी सेंटर। संवाद