नोट बंदी के कारण पैदा हुए नगदी संकट के चलते तीसरे दिन भी गल्ला मंडी में हड़ताल रही। मंडी में सन्नाटे के हालात पसरे रहे। हड़ताल के चलते पल्लेदारों के सामने भी रोजगार की समस्या होने लगी है।
गल्ला मंडी में प्रतिदिन ही डेढ़ से दो करोड़ की नगदी की जरूरत होती है, लेकिन बैंको से इतना धन नहीं निकल पा रहा। जिससे कारोबारियों के सामने मक्का, बाजरा, धान, गेहूं, सरसों, मूंग, उड़द आदि की फसल लेकर मंडी आने वाले किसानों के लिए धन देने की समस्या खड़ी हो गई। धन की व्यवस्था न हो पाने से तीन दिन से कारोबारी हड़ताल पर चल रहे हैँ। हड़ताल के चलते किसान भी मंडी नहीं पहुंच रहे। हड़ताल के चलते मंडी में पल्लेदारी करने वालों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने लगा है।
उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे। वे काफी परेशान हैँ। हड़ताल के चलते किसी के भी मंडी न पहुंचने से सन्नाटे के हालात तीसरे दिन भी बने रहे। इस दौरान शिशु पाल, बहादुर सिंह, सत्यपाल, अशोक माहश्वरी, विनय माहेश्वरी, किशन चंद्र शर्मा, एसबी सिंह, केशव गुप्ता, निरूत्तम सिंह आदि मौजूद रहे।