जलेसर। लखनऊ की सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) टीम ने बुधवार को आकर 9 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा किया। कुछ लोग बेरोजगार युवकों के नाम पर फर्जी कंपनी बनाकर व्यापार कर रहे थे। कस्बे के सुमित के नाम पर 60 करोड़ का व्यापार कर 9 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर जीएसटी चोरी की गई है।
लखनऊ की सीजीएसटी टीम बुधवार को कस्बे के सुमित के घर पहुंचकर 9 करोड़ के आईटीसी के दावे और व्यापार के संबंध में पूछताछ करने लगी। इस पर वह हैरत में पड़ गया क्योंकि वह बेरोजगार है। टीम ने बताया उसके नाम पर एक फर्म पंजीकृत है जिसमें उसका आधार और पेनकार्ड लगा है। सुमित ने बताया एक साल पहले नवंबर माह में क्षेत्र के कुछ लोगों ने उससे संपर्क किया था जो एक फैक्टरी खोलना चाहते थे।
इसके लिए उन्होंने उससे आधार और पेनकार्ड लिया था। इसके एवज में उसको 15 हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। जांच में कस्बे के गोलनगर निवासी सोनू कुशवाहा, सरायखानम निवासी विकास बघेल, रोहित सहित एक दर्जन से अधिक लोग इसमें शामिल हैं। इन लोगों ने गरीब और बेरोजगार युवकों को धन का लालच देकर उनके दस्तावेज का उपयोग कर फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी की चोरी की है।
यह गिरोह 18 प्रतिशत जीएसटी दर वाले कच्चे माल को खरीदता था और 3 प्रतिशत की दर से चेन बनाकर बेचता था। इस गिरोह के लगभग 60 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाकर 9 करोड़ रुपये की आईटीसी का रिफंड लिया है। टीम ने सुमित के साथ ही कस्बे के गोलू जैन, गौरव कश्यप, अनूप और दीपक भारती के यहां छापा मारकर पूछताछ की है।
कर विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता पर भी संदेह
जांच में सीजीएसटी टीम को व्यापार स्थलों पर पुरानी मशीनों के अलावा कुछ भी नहीं मिला। जबकि जीएसटी पंजीकरण के समय व्यापार स्थल और स्टॉक का निरीक्षण किया जाता है। आईटीसी क्लेम के समय इनवर्टेड टैक्स प्रणाली के तहत जांच की जाती है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा होना राज्य कर विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।