एटा। पत्नी की असामयिक मृत्यु हो गई तो बच्चों के लिए पिता के साथ ही मां का दायित्व भी निभाया। तीन बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। इनमें से एक पुत्र वर्तमान में रूस में नौकरी कर रहा है।छछैना निवासी रविंद्र पाल सिंह की पत्नी कमलेश देवी का 21 मार्च 1994 को निधन हो गया। उस समय पुत्र शिवकांत 5 वर्ष, पुत्री सरिता 3 वर्ष और सबसे छोटा पुत्र शिवेंद्रकांत केवल 6 महीने का था। पत्नी की मौत और छोटे बच्चों को लेकर रविंद्र सदमे में थे। सेना में नौकरी कर रहे थे। लोगों का कहना था कि सेना में नौकरी करके बच्चों का पालन-पोषण संभव नहीं है। या फिर रविंद्र को दूसरी शादी करनी पड़ेगी। लेकिन रविंद्र ने सभी कयासों को दरकिनार करते हुए प्रण लिया कि बच्चों का पालन-पोषण भी करेंगे और देश सेवा भी, लेकिन दूसरी शादी नहीं करेंगे।
शिवकांत व सरिता को प्राइवेट स्कूल के हॉस्टल में प्रवेश दिलाया। जबकि 6 महीने के शिवेंद्र को उन्होंने अपने साथ रखा। पोस्टिंग के अनुसार कभी पूना, कभी जम्मू कभी राजौरी विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों में जहां-जहां उनकी तैनाती रही, शिवेंद्र उनके साथ रहा। वर्तमान में रविंद्र पाल सिंह सेवानिवृत्ति के बाद घर पर हैं। वहीं उनका पुत्र शिवकांत रूस में एक कंपनी में इंजीनियर के रूप में सेवाएं दे रहा है। सरिता का विवाह कर दिया। संवाद
गांवों में फेरी लगाकर बिटिया को बना दिया मार्केटिंग इंस्पेक्टर
कस्बे के रहने वाले महेंद्र गुप्ता ने जी-तोड़ मेहनत की और अपनी बेटी पूजा गुप्ता को मार्केटिंग इंस्पेक्टर बनाकर मंजिल हासिल करा दी। महेंद्र गुप्ता कॉस्मेटिक उत्पादों की बिक्री करते हैं। इसके लिए साइकिल से गांव-गांव पहुंचते हैं। इस काम में बहुत अधिक कमाई नहीं है। लेकिन अन्य खर्चों को नियंत्रित कर बच्चों की शिक्षा में कमी नहीं आने दी। पूजा की मां का बचपन में ही निधन हो गया। ऐसे में पिता की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई। हालांकि उन्होंने अपने सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों में सामंजस्य बनाकर बच्चों को शिक्षा दिलाई। पूजा ने पिछले साल लोअर पीसीएस एग्जाम उत्तीर्ण कर मार्केटिंग इंस्पेक्टर की नौकरी हासिल की। इसके साथ ही पिता को अपनी मेहनत और त्याग का फल मिल गया। पूजा कहती हैं कि पिता ने ही मां का फर्ज भी निभाया। मुझ पर विश्वास कर मेरे हर निर्णय में साथ दिया। यही वजह है कि मैं आज कामयाब बन सकी।