500 रुपये के पुराने नोट समितियों पर नहीं लिए जाने के कारण किसानों को बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि किसानों ने केंद्रीय बीज केंद्रों से 500 रुपये के पुराने नोट पर बीज की खरीदारी की। किसानों ने केंद्रीय बीज भंडारों पर 1000 रुपये के पुराने नोट चलाने की भी मांग की है।
एटा, अलीगंज, जलेसर, अवागढ़, मिरहची, मलावन के छह कृषि बीज भंडार के अलावा जिले में 250 निजी बीज विक्रेता हैं। इन्हें इस बार 5400 क्विंटल गेहूूं का बीज बेचने का लक्ष्य है, लेकिन नोटबंदी के कारण अभी तक 1000 क्विंटल बीज ही बिक पाया है।
सरकार ने अब केंद्रीय बीज भंडारों पर पांच सौ रुपये के पुराने नोट से बीज बिकवाली के आदेश दिए हैं। इससे मंगलवार को किसानों ने केंद्रीय बीज भंडार से गेहूं बीज खरीदे। अकेले जिला मुख्यालय स्थित केंद्रीय बीज भंडार से मंगलवार को ही चार क्विंटल बीज बिका।
इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसान नोट बंदी के कारण खाद और बीज खरीदने के लिए कितने परेशान हैं। किसानों ने प्रदेश सरकार से 1000 रुपये के पुराने नोट पर भी खाद-बीज खरीदने का आदेश देने की मांग की है। नए आदेश पर गलतफहमी के कारण किसान मंगलवार को पुराना 500 रुपये का नोट देकर खाद खरीदने कोआपरेटिव समितियों पर पहुंच गए, लेकिन उन्हें लौटा दिया गया।
किसानों की सुनिए
पुरा निवासी किसान विजय सिंह ने कहा सरकार ने 500 रुपये के पुराने नोट पर बीज खरीदने के आदेश से राहत मिली है। बेहतर होता पुराने नोट पर खाद और बीज दोनों खरीदने की छूट मिलती। शीतलपुर निवासी रनवीर सिंह ने कहा कि जिन किसानों के पास 1000 रुपये के नोट हैं, वे कहां जाएं? उनके लिए सरकार ने खाद और बीज खरीदने की कोई व्यवस्था नहीं की है।