राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बृहस्पतिवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट पेश किया। इस बजट में किसानों के लिए संपदा योजना सहित कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की बात कही गई है। आत्मनिर्भर तिलहन अभियान से किसानों को मजबूती प्रदान करने का काम किया जाएगा, लेकिन स्थानीय स्तर पर किसानों को बजट रास नहीं आया। उनका कहना था कि किसान को कुछ नहीं मिला।
किसान हित की बात करने वाली सरकार ने बजट में कुछ नहीं दिया है। किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है, न तो एमएसपी की गारंटी लिखित में दी गई है और न ही कोई अन्य लाभ किसानों को दिया जा रहा है। -ओमप्रकाश, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)
बजट किसानों के हित को ध्यान में रखकर नहीं दिया गया है। एमएसपी या कर्जमाफी की कोई बात नहीं की गई है। इससे बजट अधूरा है। सरकार चंद लोगों के लिए काम कर रही है और किसानों की उपेक्षा की जा रही है। -पवन ठाकुर, भारतीय किसान यूनियन (किसान)
जिले के किसानों को बजट से काफी उम्मीदें थी। मगर कोई फायदा नहीं हुआ। न कर्ज माफी की बात हुई और न ही बिना ब्याज के ऋण मिलने की बात कही गई है। इसको देखकर किसानों को मायूसी ही हाथ लगी है। पुरानी योजनाएं ही संचालित दिखाई गई हैं। -प्रेम किशोर, नगला सेमरा
इस बार के बजट में पिछली योजनाओं का ही गुणगान किया गया है। जब तक काम धरातल पर नहीं उतरे तो घोषणा से कोई लाभ नहीं होता है। सरकार को चुनावी लॉलीपॉप की जगह किसानों के लिए धरातल पर काम करना चाहिए। इससे कुछ फायदा हो सके। -सुनील कुमार, नगला डूडा