जलेसर/एटा। आदेशों के बावजूद प्रशासनिक व्यवस्थाएं आस्था का सैलाब न रोक सकीं। शनिवार को जात के लिए पहुंची भीड़ से पूरा जलेसर दिन भर जाम में जूझता रहा। इस दौरान दरगाह बंद रही लेकिन स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं की धर्मशाला, पेड़ और दुकानों पर ही पूजा करा दी।
जलेसर स्थित बड़े मियां और छोटे मियां की दरगाह पर जात के लिए शनिवार को भीड़ उमड़ती है। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर डीएम अंकित अग्रवाल ने बृहस्पतिवार को जात और बाहरी लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बावजूद लोग आते रहे। शनिवार सुबह से कस्बे के सभी प्रवेश मार्गों पर पुलिस, पालिका और राजस्व विभाग के लोगों को तैनात कर दिया गया।
कर्मचारियों ने वाहनों और भीड़ को रोककर लौटाना शुरू किया। इसके बाद लोगों ने मुख्य मार्गों के स्थान पर गलियों से दरगाह की ओर जाना शुरू कर दिया लेकिन दरगाह बंद थीं। कुछ स्थानीय लोगों ने मोहल्ला हथौड़ा में एक पेड़ पर हरा कपड़ा बांध दिया। मैन रोड पर बाजार में स्थित होतीलाल धर्मशाला के बाहर और नाला बाजार में दुकानों के बाहर हरी चादर डालकर और पूजा का सामान रखकर जात की जगह बताकर बाहरी लोगों की आस्था से खिलवाड़ किया।
इस दौरान जात करने आए लोगों से 200-300 रुपये लेकर पूजा करा दी गई। उधर, लोगों की अपार भीड़ के चलते कस्बे के हर मार्ग पर सुबह से शाम तक जाम के हालात बने रहे।
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फंसी एडीएम प्रशासन की गाड़ी
संपूर्ण समाधान दिवस में तहसील जलेसर आते और लौटते समय एडीएम प्रशासन विवेक कुमार मिश्र की गाड़ी भी जाम में फंस गई। तहसील पहुंचने और कस्बे से बाहर तक निकलने में काफी समय उन्हें जूझना पड़ा।
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जलेसर में सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कराकर वाहनों का प्रवेश नहीं होने दिया गया। गलियों आदि से होकर लोग पहुंच गए। दरगाह के आसपास इलाके को भी पूरी तरह बंद करा दिया गया था। जात बंद होने का संदेश श्रद्धालुओं में पहुंच गया है, अब अगले दिवसों पर भीड़ कम होने की उम्मीद है।
- विवेक कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन