एटा। मौसम में तेजी से हो रहे उतार-चढ़ाव से बच्चे रोगों की चपेट में आ रहे हैं। जरा सी लापरवाही से बुखार, उल्टी-दस्त के शिकार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बच्चों की संख्या जहां 15 दिन पहले 20 से 30 तक थी, अब बढ़कर 50 पहुंच गई है।
पिछले दिनों बरसात और इसके बाद दो-तीन दिन से शाम को ठंडी हवा चलने से मौसम में बदलाव आया है। हालांकि दिन में तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है। बुधवार को अधिकतम तापमान 37 डिग्री रहा, जबकि मंगलवार रात 24 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। अचानक से तापमान में होने वाले इतने बड़े अंतर को बच्चे सहन नहीं कर पा रहे। इस उतार-चढ़ाव से बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी व निजी अस्पताल बीमार बच्चों से भरे पड़े हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही बच्चों में उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी व जकड़न की समस्या बढ़ने की आशंका रहती है।
बुधवार को मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में 35 बीमार बच्चे भर्ती थे। वहीं ओपीडी में लगभग 50 बच्चे इसी प्रकार की समस्या से पीड़ित दवा लेने आए। डॉ. कावेरी उपाध्याय ने बताया कि बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है। कभी-कभी अभिभावक देखभाल कम कर देते हैं तो बच्चे बीमार पड़ जाते हैं। गर्मी में बच्चों की देखभाल करने में जरा सी भी ढिलाई नहीं करनी चाहिए। क्योंकि पांच साल से कम आयु के बच्चों में दस्त का खतरा अधिक रहता है। समय से इलाज न होने पर यह रोग जानलेवा भी साबित हो सकता है।
डॉ. निहारिका ने बताया कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं। दोपहर के समय बच्चों को धूप में लेकर कहीं भी न निकलें। अगर अधिक जरूरी है तो पूरी तरह से कपड़े से ढककर और छाता लगाकर ही निकलें। रात में ध्यान रखें कि तापमान कम होता है तो कूलर, एसी बंद कर दें।