एटा। महिला उत्पीड़न सहित अन्य समस्याओं को सुनने और निस्तारण करने के लिए महिला थानों की स्थापना जिलों में की गईं। शहर में भी आगरा रोड पर महिला थाना बनाया गया। लेकिन महिलाओं को इस पर कम भरोसा हो रहा है। जनवरी से लेकर अब तक महज 18 मुकदमे ही यहां दर्ज कराए गए हैं।आगरा रोड स्थित महिला थाना पर 12 जनवरी 2023 को साल का पहला मुकदमा सृष्टि उर्फ रितिका गुप्ता निवासी काली मंदिर ठंडी सड़क ने अपने पति दीपक गुप्ता सहित चार के खिलाफ दर्ज कराया गया था। इसके बाद पूरे वर्ष 18 मुकदमा ही दर्ज किए जा सके। इनमें जनवरी, फरवरी व मार्च में दो-दो, अप्रैल व मई में एक-एक और अगस्त में तीन मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। जबकि जून और जुलाई में एक भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। महिला उत्पीड़न की कम एफआईआर दर्ज होने की वजह महिलाओं काे भरोसा नहीं होना है अथवा जानकारी का अभाव है। थाना प्रभारी नंदनी सिंह का कहना है कि महिला उत्पीड़न से संबंधित मामले अधिकारियों के पास आते हैं तो पहले परिवार परामर्श केंद्र पर सुलह समझौते के लिए भेजे जाते हैं। अगर समझौता नहीं होता है, अधिकारी किसी थाने पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश करते हैं वहां मुकदमा लिखा जाता है। हमारे पास जो भी महिला उत्पीड़न की शिकार आती है उसको पूरा सहयोग कर मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसके बाद समय से निस्तारण करते हैं।
वर्तमान में महज 3 मामले हैं लंवित
महिला थाना पर 18 मुकदमा अब तक दर्ज जरूर हुए हैं। लेकिन निस्तारण प्रक्रिया काफी तेजी से चली है। यहां 18 में से 12 में आरोप पत्र न्यायालय भेजे जा चुके हैं। जबकि 3 में फाइनल रिपोर्ट लगाकर भेजी गई है। वर्तमान में 3 विवेचनाएं प्रचलित हैं।
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थाने पर तैनात है इतना पुलिस बल
महिला थाने पर एक पद निरीक्षक का है, जबकि दो उप निरीक्षक के हैं। महिला आरक्षियों की तैनाती 10 की अपेक्षा 22 है। एक कंप्यूटर ऑपरेटर व एक पुरुष आरक्षी चालक है। जो पर्यात संख्या बल दर्शाता है।