एटा। मेडिकल कॉलेज के स्त्री और प्रसूति रोग विभाग में गर्भवती समेत अन्य महिलाओं की लंबी कतार लग रही है। ओपीडी में सबसे अधिक विटामिन डी की कमी से पीड़ित महिलाएं उपचार ले रही हैं। इसके साथ ही एनेमिया, कमर दर्द, सिर दर्द, अनियमित पीरियड समेत कई बीमारियों को लेकर उपचार दिया जा रहा है। हर रोज 60 फीसदी महिलाएं विटामिन डी की कमी से पीड़ित मिल रही है, जिन्हें उपचार दिया जा रहा है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. साधना सिंह ने बताया कि बदलती जीवनशैली के चलते रोजाना 60 फीसदी महिलाएं पर्याप्त धूप न लेने की वजह से विटामिन डी व डी 3 की कमी का शिकार हो रही हैं। वह इसकी पूर्ति के लिए दवाइयों पर निर्भर हैं। महिलाएं ज्यादातर घर के कामकाज में व्यस्त रहती हैं जिस वजह से उन्हें धूप लेने का समय नहीं मिल पाता है। महिलाओं में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव हैं। मेनोपॉज के बाद जिन महिलाओं में कैल्शियम की कमी होती है उनमें विटामिन डी भी कम होता है। उनकी हड्डियों को नुकसान पहुंचने की आशंका ज्यादा होती है। गर्भवती महिलाओं में सबसे अधिक विटामिन डी की कमी हो रही है। बताया कि रोजाना 250 महिलाएं विभिन्न बीमारियों को लेकर आती हैं। इसमें 150 महिलाएं विटामिन डी की कमी से परेशान रहती है।
विटामिन डी की कमी के लक्षणः
- बार-बार बीमार पड़ना या संक्रमण का शिकार बनना।
- थकान रहना, हड्डियों तथा पीठ में दर्द।
- घाव भरने में परेशानी
- मांसपेशियों में दर्द।
इन बीमारियों का होता है खतराः
- मोटापा बढ़ना।
- तनाव व अवसाद की स्थिति।
- हड्डियों का बार-बार फ्रैक्चर होने की आशंका।
- अल्जाइमर
-कई तरह के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।
बचाव के उपायः
- हर दिन सुबह धूप का सेवन जरूर करें।
- दूध और उससे बनने वाले उत्पाद का सेवन करें।
- संतरे को डाइट में शामिल करें।
- अंडे की जर्दी या मशरूम खाएं।