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Etah News: एमडीआर वार्ड में ताला, सामान्य के साथ भर्ती किए जा रहे गंभीर मरीज

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मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में एमडीआर वार्ड में लगा ताला। संवाद
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एटा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। गंभीर बीमारियों के उपचार के नाम पर यहां मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ चेस्ट डिजीज एंड ट्यूबरक्लोसिस (टीबीसीटी) वार्ड में संदिग्ध टीबी मरीजों के साथ ही मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के मरीजों को भी भर्ती किया जा रहा है। आश्चर्यजनक यह है कि इमरजेंसी में बना विशेष एमडीआर वार्ड बंद है और वहां ताला लटका हुआ है।
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टीबीसीडी विभाग में प्रतिदिन क्षय रोग और सांस संबंधी बीमारियों के दर्जनों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गंभीर स्थिति होने पर उन्हें वार्ड में भर्ती किया जाता है। नियमानुसार, एमडीआर टीबी एक बेहद गंभीर और संक्रामक स्थिति है, जिसके मरीजों को अन्य मरीजों से पूरी तरह अलग (आइसोलेट) रखा जाना चाहिए ताकि संक्रमण न फैले। यदि एमडीआर टीबी का मरीज सामान्य मरीजों के संपर्क में आता है तो अन्य लोगों में भी इसके फैलने की पूरी आशंका बनी रहती है। बावजूद इसके, मेडिकल कॉलेज प्रशासन एमडीआर मरीजों को सामान्य वार्ड में ही भर्ती कर रहा है।



हर माह मिलते हैं औसतन 10 मरीज

टीबीसीडी विभाग के चिकित्सक डॉ. शिवांक ने बताया कि विभाग में हर महीने औसतन 10 ऐसे मरीज मिलते हैं जो एमडीआर टीबी से पीड़ित होते हैं। इन मरीजों को करीब 7 दिनों तक भर्ती कर विभिन्न जांचें और उपचार दिया जाता है। वर्तमान में भी टीबीसीडी वार्ड में एक एमडीआर टीबी का मरीज भर्ती है, जिसका उपचार चल रहा है। इसी वार्ड में दो अन्य संदिग्ध टीबी मरीज भी भर्ती हैं, जिन्हें संक्रमण का सीधा खतरा बना हुआ है।
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कबाड़खाना बना एमडीआर वार्ड

मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी विंग में एमडीआर मरीजों के लिए विशेष वार्ड बनाया गया है, लेकिन वर्तमान में इस पर ताला जड़ा है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार, इस वार्ड को अब स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और इसमें कबाड़ भर दिया गया है। यही कारण है कि एमडीआर मरीजों को यहां भर्ती करने के बजाय सामान्य मरीजों के बीच रखा जा रहा है।



वर्जन

एमडीआर टीबी के मरीजों को टीबीसीडी वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है। इससे अन्य लोगों को कोई विशेष समस्या नहीं है। हालांकि, हम प्रयास कर रहे हैं कि एमडीआर मरीजों के लिए अलग से वार्ड की व्यवस्था हो।
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-डॉ. संतोष, विभागाध्यक्ष, टीबीसीडी


टीबीसीडी विभाग में एमडीआर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इस संबंध में टीबीसीडी विभाग के एचओडी ही व्यवस्था करेंगे।

-डॉ. सुरेश चंद्रा, सीएमएस
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