मेडिकल कॉलेज में बना टीबीसीडी विभाग। संवाद
एटा। मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ चेस्ट डिसीज एंड ट्यूबरक्लोसिस (टीबीसीडी) विभाग में मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट (एमडीआर) टीबी मरीजों के लिए अलग से वार्ड नहीं बनाया गया। साल 2023 में एमडीआर वार्ड बनाने के लिए शासन से बजट भेजा गया, जिसका बंदरबाट कर लिया गया। मेडिकल कॉलेज के टीबीसीडी विभाग में हर माह औसतन 10 मरीज एमडीआर टीबी से पीड़ित आते हैं, लेकिन इन्हें भर्ती टीबीसीडी विभाग में किया जा रहा है। इससे अन्य मरीजों में एमडीआर टीबी फैलने का भय बना हुआ है। इसके मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। वर्तमान में टीबीसीडी विभाग में एक मरीज भर्ती है। उसका उपचार किया जा रहा है। उस मरीज को भी संदिग्ध टीबी मरीज के साथ भर्ती कर दिया गया। जबकि शासन से साल 2023 में मेडिकल कॉलेज में अलग से एमडीआर वार्ड बनाने के लिए करीब 30 हजार का बजट भेजा गया था। स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही की वजह से अन्य मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है। क्योंकि एमडीआर टीबी जानलेवा बीमारी होती है। इसके मरीज के संपर्क में आने से दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। टीबीसीडी विभाग के एचओडी डॉ. संतोष ने बताया कि इमरजेंसी में वर्तमान में काम चल रहा है। इसकी वजह से उसका सामान एमडीआर वार्ड में रखवा दिया है। जल्दी ही वार्ड से सामान निकलवा दिया जाएगा और एमडीआर वार्ड को संचालित किया जाएगा।