एटा। जिला जेल में बंदी जैविक खेती कर रहे हैं। आलू के साथ सब्जियां उगाई जा रही हैं। यहां पिछले साल से प्राकृतिक और जैविक तरीके से खेती करना शुरू किया गया। आलू की अच्छी पैदावार हुई।
बंदियों और कैदियों को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनानेे के लिए जेल परिसर के अंदर स्थित कृषि फार्म में हरी सब्जियों की खेती कराई जा रही है। यहां उगाई गई सब्जियां ही जेल की रसोई में पकाई जाती हैं। पिछले साल बंदियों की मेहनत से करीब 350 क्विंटल आलू पैदा हुआ। इसे इस्तेमाल करने के अलावा कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखवाया गया। संवाद
जैविक खेती कर संभाल रहे अपनी सेहत
कारागार में निरुद्ध कैदियों, बंदियों का स्वास्थ्य अच्छा रहे, उन्हें ताजी हरी सब्जियां मिल सकें, इसके लिए जिला जेल परिसर में जैविक खेती कराई जा रही है। जेल आने से पहले खेतीबाड़ी करने वाले बंदियों को खेती करने की जिम्मेदारी दी गई है।
तीन एकड़ में 60 बंदी करते हैं खेती
जिला कारागार में लगभग तीन एकड़ का कृषि फार्म है। इसमें खेती होती है। इस समय आलू, बैंगन, पालक, गाजर, चुकंदर, गोभी, अरबी, पत्ता गोभी, चना, मूली, शलजम आदि की पैदावार हो रही है। यहां करीब 60 बंदियों की ड्यूटी खेती करने में लगाई गई है।
पिट बनाकर तैयार की जाती है खाद
जेल अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि जेल में पिट बनाकर जैविक खाद तैयार की जाती है। गड्ढा खोदकर इसमें सब्जियों के अवशेष और पेड़-पौधे के पत्ते आदि डालकर जैविक खाद तैयार करते हैं। इसे फसलों में डाला जाता है।
पिछले साल ये हुई पैदावार
आलू : 350 क्विंटल
अरबी : 12 क्विंटल
फूलगोभी: 116 क्विंटल
पत्ता गोभी: 120 क्विंटल