एटा। अभिभावकों के जिम्मेदारी से जल्द निजात पाने के लिए कम उम्र में बेटियों की शादी की जा रही है। इससे इन्हें बालिग होने से पहले मां बनने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। यह तमाम बीमारियों से घिर जाती हैं। इनकी सेहत से जिंदगी भर खिलवाड़ होता रहता है। यह खुलासा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 में हुआ है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। कम उम्र में बेटियों की शादी इनके लिए मुसीबत साबित हो रही है। 15 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की बेटियों पर सर्वे में कहा गया कि इन्हें मासिक धर्म और स्वच्छता को लेकर पूरी जानकारी नहीं हो पाती है। ऐसे में कम उम्र में शादी होने से यह जल्द मां बन जाती हैं। ऐसी बेटियां परिवार की जिम्मेदारियों को उठाने की स्थिति में नहीं होने से गंभीर बीमारियों की शिकार हो जाती हैं। इनमें खून की कमी बनी रहती है। अन्य समस्याएं भी घेरे रहती हैं। कम उम्र में शादी होने की वजह से मासिक धर्म और स्वच्छता की जानकारी नहीं होने का वर्ष 2015-16 में सर्वे -4 के दौरान यह आंकड़ा 48.9 था। पांच वर्ष बाद 2020-21 में यह बढ़कर 64.5 हो गया।
हालांकि बालिग होने से पहले शादी करने वाली बेटियों की दर में गिरावट आई है। यह आंक ड़ा पांच साल में 27.1 से 20.1 पर पहुंच गया है। बालिग होने से पहले 15 से 19 वर्ष की आयु में मां बनने के आंकड़ों में पांच वर्ष बाद गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 9.2 से 4.3 पर आ गया। यहां गिरावट जरूर हुई है लेकिन बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर अभी भी अनदेखी की जा रही है।
बेटियों की जल्दी शादी करने से शारीरिक और मानसिक रूप से परेशानियां सामने आती हैं। इसे हर जिम्मेदार अभिभावक को बखूबी समझना होगा। जागरूकता की कमी की वजह से बेटियों का भविष्य बर्बाद हो जाता है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के आंकड़ों से बेटियों की सेहत का पता चला है। यह चिंतनीय है।
डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी, सीएमओ