बिजली चोरी के मामले में जेल भेजे गए बुजुर्ग जमानत पर रिहा हो गए। न्यायालय में तारीखें चल रही है। एक महीने पहले वह तारीख पर न्यायालय पहुंचे। उन्होंने न्यायालय में कहा कि साहब मुझे दोबारा जेल भिजवा दो, वहां खाने-पीने का इंतजाम तो हो जाता है। इस पर न्यायालय ने उन्हें वृद्धाश्रम भेजने के निर्देश दिए। पिछले एक महीने से वह वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
जेल जाने की बात आए तो कोई भी व्यक्ति घबरा जाएगा, लेकिन 83 साल के सोनपाल ने न्यायालय से जेल भेजने की गुहार लगाई। सुनकर अजीब लग रहा होगा लेकिन यह सच है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि दो वक्त का खाना नसीब हो सके। उनकी दास्तां सुनने वालों के आंखों में भी आंसू आ गए। न्यायालय ने उन्हें वृद्धाश्रम में भिजवाया और ठीक से देखरेख के निर्देश दिए। फिलहाल सोनपाल कासगंज रोड स्थित वृद्धाश्रम में अन्य लोगों के बीच रह रहे हैं। रुकने और खाने की अच्छी व्यवस्था होने से वह अब खुश हैं।
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गांव नगला ख्याली निवासी सोनपाल की श्रवण शक्ति कमजोर है। काफी तेज बोलने पर वह बातों को समझ पाते हैं। सोनपाल ने शादी नहीं की। वह अकेले हैं। परिवार में और कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि वह रिक्शा चलाकर अपना पेट पालते थे। उम्र के बढ़ते पढ़ाव में रिक्शा चलाने के लिए ताकत नहीं बची तो यह काम छोड़ना पड़ा। उनका गांव में मकान था। करीब पांच वर्ष पहले बिजली चोरी के मामले में विभाग ने उन पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में दो वर्ष पहले उन्हें जेल हो गई। साढ़े तीन महीने वह जेल में रहे। बाद में जमानत पर रिहा हो गए। इसके बाद न्यायालय में तारीखें चल रही है। एक महीने पहले वह तारीख पर न्यायालय पहुंचे। उन्होंने न्यायालय में कहा कि साहब मुझे दोबारा जेल भिजवा दो, वहां खाने-पीने का इंतजाम तो हो जाता है। इस पर न्यायालय ने उन्हें वृद्धाश्रम भेजने के निर्देश दिए। पिछले एक महीने से वह वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
25 लोगों का परिवार, नेत्रपाल के लिए जगह नहीं
ऐसी ही कुछ दास्तां एटा के नेत्रपाल गिरि की है। 64 वर्षीय नेत्रपाल दर-दर भटकने के बाद 20 दिन पहले वृद्धाश्रम में पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि पीपल अड्डा पर रहते थे। चार बेटे हैं। सभी का भरापूरा परिवार है। बड़ा बेटा मनोज गिरि दूध की डेयरी संभालता है। दूसरे नंबर का प्रमोद की भी दही, पनीर की दुकान है। तीसरे नंबर का अखिलेश कंप्यूटर का काम करता है। चौथे नंबर के निखलेश भी पनीर और दूध की सप्लाई का काम करता है। परिवार में चार बेटे, चार बहुएं, नौ नाती, उनकी पत्नियां और बच्चे हैं। कुछ माह पहले तक उन्हें परिवार में रहने और खाने की व्यवस्था हो जाती थी। बाद में क्लेश होने लगी। इस पर वह भूतेश्वर श्मशान घाट पर बने मंदिर पर रहने लगे। वहां से भी उन्हें हटा दिया गया। अब 20 दिन से वृद्धाश्रम में रहकर गुजर बसर कर रहे हैं।
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इकलौते बेटे ने मां को घर से निकाला
जैथरा के गांव दहेली खुर्द की 66 वर्षीय रूपबती भी आठ साल से वृद्धाश्रम में जीवन यापन कर रही हैं। पति की 20 साल पहले मौत हो गई। उन्होंने बताया कि उनका एक ही बेटा सुखवीर है। वह शराब पीकर मारपीट करता था। पांच बीघा में से ढाई बीघा जमीन उसने अपने नाम करा ली। इस पैसे को लेकर वह पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली चला गया। गांव वाले घर में ताला लगा है। वहां बेटा रहने नहीं देता। अब वह वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं।