जिले में 23 राष्ट्रीयकृत बैंक की विभिन्न शाखाएं बेरोजगारों को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहीं है, लेकिन लोन देने से कतरा रही हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015 मे विभिन्न बैंक शाखाओं ने जिले के 669 बेरोजगारों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया, लेकिन स्वरोजगार के लिए 100 आवेदन में से बैंक ने सिर्फ तीन लोगों का ऋण दिया और बाकी के आवेदनों को लंबित सूची में डाल दिया है। इसके चलते जिले के हजारों स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित किए युवा बैंकों की उपेक्षा के कारण बेरोजगार हैं।
अग्रणी जिला मंडल प्रबंधक एलसी पॉल ने बताया कि एटा जिले में 23 बैंकों की अनेक शाखाएं बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर आठ साल से स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बैंक शाखाओं के आंकड़े बताते हैं कि आठ साल में बैंकों ने जिले के 3998 बेरोजगार युवकों को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिलाया, लेकिन लोन सिर्फ 463 लोगों के स्वीकृत किए। इनमे से 2651 बेरोजगारों ने विभिन्न कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन किए, लेकिन सफलता 342 को ही मिली।
वर्ष 2015 में जिन बैंक शाखाओं में प्रशिक्षित बेरोजगारों ने स्वरोजगार के लिए लोन के आवेदन किए उनमें से नौ केनरा बैंक शाखाओं ने 47 में से 1,11 ग्रामीण बैंक शाखाओं ने 39 में से 2 आवेदकों को लोन स्वीकृत किए हैं। जबकि एसबीआई शाखाओं, यूनाईटेड, सिंडीकेट, सेंट्रल बैंक की नौ शाखाओं ने 97 प्रशिक्षित बेरोजगार को स्वरोजगार के लिए लोन देने की जरूरत नहीं समझी। जिले भर की बैंक शाखाओं की उपेक्षा के कारण हजारों बेरोजगार प्रशिक्षित युवक स्वरोजगार के लिए भटक रहे हैं।