ट्रेजरी ऑफिस में बिल की फाइल पास करने के लिए रुपये लेता बाबू।
- फोटो : ETAH
एटा। सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कोषागार से पेंशन के साथ ही उनकी बीमारी के दौरान इलाज में खर्च हुए रुपयों का भुगतान किया जाता है। इसके नाम पर बुजुर्ग पेंशनरों से आठ से दस प्रतिशत तक कमीशन की मांग की जाती है। ऐसा ही एक मामला आया, जहां बुजुर्ग से उपचार के बिल का भुगतान करने के नाम पर आठ हजार रुपये मांगे गए। इसका स्टिंग ऑपरेशन किया गया तो आरोप की पुष्टि हुई।
जिला कलक्ट्रेट परिसर में कोषागार संचालित है। एक व्यक्ति पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त है। कुछ माह पूर्व वह बीमार पड़े तो एक निजी अस्पताल में उपचार कराया, इसका बिल जब उन्होंने भुगतान के लिए कोषागार में प्रस्तुत किया तो संबंधित लिपिक द्वारा कुल बिल एक लाख पंद्रह हजार का भुगतान करने के लिए कमीशन मांगा गया। गुहार के बाद आठ हजार रुपये से शुरू हुई बात दो हजार रुपये में तय हुई। संवाददाता को जब जानकारी हुई तो उसने पेंशनर के परिजन द्वारा बिल पास करने के नाम पर दी गई रकम का स्टिंग ऑपरेशन किया। इसमें लिपिक दो हजार रुपये अपने टेबिल की ड्रॉज में डलवा रहा है।