एटा। मेडिकल कॉलेज में मरीजों के साथ खिलवाड़ की जा रही है। ओपीडी में इलाज की कमान पूरी तरह से प्रशिक्षु (इंटर्न) चिकित्सकों के हाथों में है।
मोटा वेतन लेने वाले जूनियर और सीनियर रेजिडेंट चिकित्सक या तो समय पर नहीं पहुंचते या फिर देर से पहुंचते हैं। संवेदनशील माने जाने वाले बाल रोग विभाग की ओपीडी तक में यही हालात हैं, यहां बीमार बच्चों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
मरीज विभिन्न बीमारियों को लेकर उपचार कराने के लिए पहुंचता है लेकिन उन्हें ठीक से उपचार नहीं मिल पाता है। मेडिसिन विभाग समेत अन्य विभाग प्रशिक्षु (इंटर्न) के हवाले चल रहे हैं जबकि इन्हें वरिष्ठ चिकित्सकों की देखरेख में कार्य करना चाहिए।
यहां पर जूनियर रेजिडेंट (जेआर) व सीनियर रेजिडेंट (एसआर) सुबह 11.30 बजे से पहले ओपीडी में नहीं पहुंचते हैं। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सेवाओं को लेकर पड़ताल की जिसमें इलाज की हकीकत सामने आई।