जिला सहकारी बैंक में काली पट्टी बांधकर विरोध जताते एसोसिएशन के पदाधिकारी। स्रोत स्वयं
एटा। प्रदेश के जिला सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की बढ़ती नाराजगी अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। को-ऑपरेटिव बैंक स्टाफ एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेशभर के 16 जिला सहकारी बैंकों के कर्मचारी अपनी लंबित मांगों और कथित श्रमिक-विरोधी नीतियों के खिलाफ चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं।
एसोसिएशन के सहायक महामंत्री जितेंद्र पाल सिंह ने बताया कि लंबे समय से जिला सहकारी बैंकों में ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं जिनसे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। नई श्रम संहिताओं के लागू होने, गैर-बैंकिंग कार्यों का अनावश्यक दबाव, अवकाश के दिनों में कार्य कराने की बाध्यता तथा राजनीतिक और विभागीय हस्तक्षेप को कर्मचारी प्रमुख समस्याओं के रूप में देख रहे हैं। एसोसिएशन के सभी कर्मचारियों ने मंगलवार से काली पट्टी व बैज लगाकर कार्य किया जो आज जारी रहेगा।
इसके बाद 30 अप्रैल को प्रदेशभर में संबंधित उप/संयुक्त आयुक्त व उप/संयुक्त निबंधक को ज्ञापन सौंपा जाएगा। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में 1 अप्रैल 2021 से लंबित वेतन पुनरीक्षण लागू करना, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, पारदर्शी स्थानांतरण नीति, सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देयकों का समय पर भुगतान व कर्मचारियों के उत्पीड़न पर रोक लगाना शामिल है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा। को-ऑपरेटिव बैंक स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष राघवेंद्र ने कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों की लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से लड़ रहे हैं लेकिन अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है। अगम कश्यप, प्रदीप यादव, रजत यादव, हर्षवर्धन यादव, देवेश यादव, अरविंद यादव, सुनील यादव, सत्येंद्र यादव ने विरोध जताया।