बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी जिस शिक्षा विभाग के कंधों पर है वहीं अध्यापक अनैतिक तरीके से नौकरी करते हुए पाए जा रहे हैं। कमाल की बात तो यह है कि पकड़ में आने के बाद उन्हें जेल भेज दिया जाता है, लेकिन उनका वेतन पूर्व की तरह बैंक खाते में आता रहता है। ऐसे ही एक मामले की शिकायत मैनपुरी के युवक ने बेसिक शिक्षा निदेशक और मैनपुरी व एटा के जिलाधिकारी से की है। शिकायत में यह भी बताया गया कि किस प्रकार शिक्षक ने विभाग की आंखों में धूल झाेंककर दोबारा नौकरी हासिल की। जैथरा ब्लॉक क्षेत्र में नौकरी कर रहे शिक्षक की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
मैनपुरी के विजेंद्र सिंह ने मंगलवार को की गई शिकायत में ग्वालटोली निवासी राजीव कुमार पर नाम बदलकर और फर्जी दस्तावेज से बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी पाने का आरोप लगाया है। पहले राजीव ने राजकुमार पुत्र राजाराम निवासी यादव नगर शिकोहाबाद जिला फिरोजाबाद के नाम से इमादपुर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की नौकरी पाई। इसकी शिकायत होने पर जिले के तत्कालीन बीएसए दिनेश कुमार ने जांच कराई। शिकायत सही पाए जाने पर तत्कालीन बीएसए दिनेश कुमार ने वर्ष 2023 में राजकुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
बर्खास्तगी के बाद राजीव ने वर्ष 2024 में रोहित कुमार पुत्र श्रीकृष्ण के नाम से शिक्षक की नौकरी हासिल कर शासन और प्रशासन की तंत्र व्यवस्था को ठेंगा दिखा दिया। शिकायत में कहा गया है कि बर्खास्तगी के बाद राजीव ने वर्ष 2024 में विभाग के कुछ लोगों के साथ मिलकर रोहित नाम से बहाली और नियुक्ति का रास्ता बनाया। राजीव इस समय रोहित नाम से जैथरा क्षेत्र के सरौंठ के प्राथमिक विद्यालय में तैनात है। शिकायत में दावा किया गया है कि रोहित नाम से नौकरी कर रहे राजीव को एक मामले में तीन मार्च 2025 को पुलिस ने जेल भेजा था, जो करीब 11 माह जेल में रहा। हैरत की बात यह है कि 11 माह जेल में रहते हुए भी रोहित उर्फ राजीव का वेतन निकलता रहा।
बीएसए अनुपम अवस्थी ने बताया कि नाम बदलकर नौकरी मामले की कोई जानकारी नहीं है। अगर मुझे शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई अवश्य की जाएगी।