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दो अरब के बजट में पचास फीसदी भी नहीं मिला धन

Thu, 11 Feb 2016 11:15 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
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 सपा सरकार बनने के बाद सीएम अखिलेश यादव ने अपने हर बजट में सूबे की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर जोर दिया, लेकिन जिले में अधिकांश योजनाएं लक्ष्य को पूरा न कर सकी। आमजन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का कुल बजट दो अरब से अधिक का था लेकिन इसमें से पचास फीसदी भी धन नहीं मिला।  
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चालू वित्तीय वर्ष में बर्बाद हुई रबी की फसल के नुकसान की भरपाई अब तक नहीं हो सकी है। बिजली आपूर्ति बढ़ने के साथ विभाग की इनकम बढ़ी, लेकिन सुधार के नाम पर विद्युत निगम दो ट्रांसफार्मर की क्षमता ही बढ़ा सका है। सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र विकास योजना के तहत आधा दर्जन से अधिक विभाग को बजट नहीं मिल सका है। यही हाल पीडब्लूडी के बजट है। जिले की छह सड़कों को शासन से स्वीकृति मिलने के बाद बजट नहीं मिला। संपर्क मार्गों के लिए सरकार सिर्फ 52 लाख रुपये ही आवंटित कर पाई। इसकी वजह से जिले के लोग बदहाल सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा पेश किए गए आम बजट से लोगों को अधूरे विकास कार्यों के पूरा होने की भी उम्मीद होगी।

युवा सीएम की सरकार में युवा कल्याण के लिए सिर्फ 33 फीसदी मिला
एटा। युवा सीएम अखिलेश यादव की सरकार युवाओं के कल्याण के नाम पर प्रस्तावित बजट से सिर्फ 33 फीसदी ही युवाओं का कल्याण कर सकी है। जिले में जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए छह लाख रुपये का बजट शासन को भेजा गया था। इसके सापेक्ष ने युवा कल्याण विभाग को दो लाख रुपये ही उपलब्ध कराए। इससे जिले में प्रतियोगिताएं औपचारिकता की भेंट चढ़ गई।
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कृषि वर्ष मनाने के दावे फेल
एटा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीते आम बजट में साल को कृषि वर्ष घोषित किया था। इसमें एक घोषणा यह भी थी कि कृषि शिक्षा प्राप्त युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए एवं किसानों को कृषि निवेश तथा अन्य उपयोगी सामग्री निकट स्थानों पर उपलब्ध कराने के लिए वन स्टॉप शॉप स्थापित किए जाएंगे, इसका नाम एग्री जंक्शन होगा। वित्तीय वर्ष बीतने को है, लेकिन अब तक एग्री जंक्शन के नाम पर सिर्फ कृषि स्नातकों से आवेदन लेने का काम ही हो सका है। दूसरी ओर से जिले में चालू वित्तीय वर्ष में बर्बाद हुई रबी फसलों के मुआवजे की मांग के लिए कलक्ट्रेट पर आए दिन धरना प्रदर्शन हो रहे हैं।

विद्युत विभाग की आय बढ़ी लेकिन आपूर्ति में सुधार नहीं
एटा। जिले में बीते वित्तीय वर्ष और चालू वित्तीय वर्ष के जनवरी माह तक के आंकड़ों की तुलना करें तो विद्युत निगम ने जहां बीते वित्तीय वर्ष से अधिक बिजली की आपूर्ति की है, वहीं निगम औसतन इनकम भी बीते वर्ष की तुलना में बढ़ी है। लेकिन, बिजली सुधार के नाम पर निगम साल भर में दो ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई गई। अप्रैल 2014 से जनवरी 2015 तक जिले में 10 करोड़ 57 लाख 20 हजार यूनिट बिजली सप्लाई की गई। इसके सापेक्ष विभाग ने 30 करोड़ एक लाख 29 हजार की इनकम की। घरेलू और औद्योगिक मिलाकर उसकी इनकम का औसत 2.84 रुपये प्रति यूनिट रहा। वहीं, अप्रैल 2015 से जनवरी 2016 तक निगम ने 11 करोड़ 57 लाख 10 हजार यूनिट बिजली सप्लाई की। इससे विभाग ने 38 करोड़ 96 लाख 57 हजार की इनकम की। औसत 3.46 रुपये प्रति यूनिट रहा।

पीडब्लूडी को रहा साल भर बजट का इंतजार
एटा। पीडब्लूडी विभाग साल भर बजट का इंतजार करता रहा। हालात यह रहे कि जिले में लोहिया योजना में चयनित गांव को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों के लिए शासन की ओर से विभाग को सिर्फ 52 लाख रुपये ही उपलब्ध कराए गए। जबकि बीते वित्तीय वर्ष के दौरान विभाग को संपर्क मार्गों के लिए 107 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। दूसरी ओर से अन्य विभिन्न योजनाओं के तहत पीडब्लूडी विभाग का इसे साल 82 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसके सापेक्ष वह 64 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसके अलावा शासन की ओर से स्वीकृत एटा-शिकोहाबाद, कायमगंज-अलीगंज, एटा-टूंडला, एटा निधौली कलां-जलेसर मार्ग को बजट जारी नहीं हुआ। इसके वजह से लोग बदहाल मार्गों पर यात्रा करने को मजबूर हैं।

लोहिया गांवों को भी नहीं मिला पूरा बजट
एटा। ग्रामीण क्षेत्रों की सूरत बदलने के लिए सरकार ने डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना शुरू की। लेकिन साल दर साल बजट की लेटलतीफी योजना को परवान नहीं चढ़ने दिए। बीते वर्ष की तरह इस बार भी जिले में शासन की ओर से आधा अधूरा बजट उपलब्ध कराया गया। संपर्क मार्ग, विद्युतीकरण और लोहिया आवास के लिए जहां आधे से कम बजट मिला तो सीसी रोड, केसी ड्रेन और शौचालय के बजट को संबंधित विभाग शत प्रतिशत खर्च नहीं कर पाए हैं।

बजट के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं बीमार
एटा। गरीबों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए स्वास्थ्य मिशन के तहत कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन वास्तविकता में पात्रों को उनका लाभ नहीं मिल रहा है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण योजनाओं को सही तरीके से कियान्वयन नहीं हो रहा। इसकी वजह से सेवाएं बदहाल हो रही हैं। जनपद की पीएचसी, सीएचसी की बात तो अलग जिला अस्पताल में भी स्वास्थ्य सेवाएं बीमार हैं। चिकित्सकों के अभाव के कारण विभाग मरीजों को बेहतर चिक्तिसीय सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिए चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के साथ बजट में भी वृद्धि की जाए ताकि गरीबों को भी उपचार मिल सके।
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