मेडिकल कॉलेज में स्थित डायलिसिस सेंटर के बाहर आक्रोश जताते मरीज व तीमारदार। संवाद
एटा। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के पीछे संचालित डायलिसिस यूनिट की हालत जर्जर है। उपचार के दौरान छत से प्लास्टर गिरने की घटना के बाद से मरीज डरे हुए हैं। ऐसे में कभी किसी मरीज की जान पर बन सकती है। शुक्रवार को मरीजों और तीमारदारों ने मरम्मत कराने के लिए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, सीएमएस और जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र सौंपा।
लोगों के मुताबिक यूनिट की इमारत पुरानी होने से खस्ताहाल है। डायलिसिस के दौरान मरीजों को सुरक्षा की चिंता रहती है। प्रक्रिया में तीन से चार घंटे लगते हैं। तब तक मरीज खतरे में रहते हैं। जुलाई माह में शहर के यादव नगर के मरीज की डायलिसिस के दौरान छत से सीमेंट का बड़ा टुकड़ा गिर गया था। इससे वह घायल हो गए थे। इसके बाद भी मरम्मत की कोशिश नहीं की गई।
अब यूनिट को मेडिकल कॉलेज के नए भवन की छठवीं मंजिल पर शिफ्ट करने की तैयारी है। मरीजों का कहना है कि इस भवन तक पहुंचने में खासी मुश्किल होगी। ऐसे में इसी की मरम्मत और जीर्णोद्धार कराया जाए।
बोले मरीज और तीमारदार
यूनिट की छत से प्लास्टर के टुकड़े गिरते हैं। उपचार के दौरान मरीज खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। सेंटर की जल्द मरम्मत कराई जानी चाहिए।
- शुभम दीक्षित, मरीज
लापरवाही बरती जा रही है। कई बार मांग हुई लेकिन जीर्णोद्धार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। छत से कभी बड़ा हिस्सा गिरा तो मुश्किल हो जाएगी।
- राकेश जैन, तीमारदार
क्या है डायलिसिस
किडनी खून को साफ करती है। इसके खराब होने की स्थिति में यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है। डायलिसिस इस काम को कृत्रिम रूप से करती है।
वर्जन
डायलिसिस सेंटर की मरम्मत के लिए करीब 25 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके स्वीकृत होने के बाद मरम्मत कराई जाएगी।
- डॉ. बलवीर सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज