एटा के महाकाली मंडलों का देश भर में डंका बजता है। स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और उनके हैरत अंगेज कारनामों के साथ माता महाकाली का रूप लोगों को रोमांचित करता है। ढोल नगाड़ों की थाप पर झूमती माता महाकाली की छवि देख लोग नतमस्तक हो जाते हैं। धर्म से जुड़ी यह कला कई परिवारों के लिए रोजी का जरिया भी बनी है।
40 साल पहले शहर में दर्जनों काली मंडल रामनवमी के मौके पर शहर भर में अपनी प्रतिभा दिखाते थे। इन मंडलों में 25 से 30 कलाकार होते हैं, जो विभिन्न धार्मिक स्वरूप में जगह-जगह लोगों का मनोरंजन करते हैं। इस दौरान सबसे विशेष प्रदर्शन काली की तलवार बाजी है। काली मंडल का प्रमुख सदस्य माता महाकाली का रौद्र रूप धारण कर हाथ में तलवार लेकर निकलते हैं। कई वर्ष पूर्व स्व. रम्मू पान वाले, रमेश कुमार, उस्ताद कालीचरन ने मिलकर काली मंडल परंपरा की शुरू की थी। विभिन्न मोहल्ले के लोग मिलकर धार्मिक पात्रों की भूमिका निभाते। रामनवमी पर महाकाली शोभायात्रा में शामिल होने वाले काली मंडल पूरी रात अपने जौहर दिखाते थे। धार्मिकता से शुरू हुई यह कवायद अब रोजगार देने लगी। रामनवमी पर निकलने वाली शोभायात्रा में काली मंडलों को बुक किया जाता है। इस समय जिले में दस काली मंडल हैं। काली शोभायात्रा संयोजक दीपांकर सिंह ने बताया कि काली मंडलों के प्रदर्शन ने एटा का नाम देशभर में रोशन किया है। धर्म से जुड़ी यह कला अब कई परिवारों के लिए रोजगार का जरिया बनी है। साथ ही देवी मां की भक्ति की नई मिसाल है।
जिले में आदर्श माता महाकाली मंडल, स्टूडेंट माता महाकाली मंडल, जय दुर्गा माता महाकाली मंडल, चित्रांश माता महाकाली मंडल, शिवशक्ति काली मंडल, न्यू जय करौली महाकाली मंडल, कृष्ण माता महाकाली मंडल, श्रीराम काली मंडल, मां शीतला काली मंडल का दबदबा रहा है।
शहर में रामलीला कमेटी द्वारा सोमवार को शाम सात बजे माता महाकाली की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें काली मंडल रामलीला मंच पर प्रदर्शन करते हुए शहर में निकलेंगे। इस दौरान माता के नौ रूपों की झांकी भी निकाली जाएगी।