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घर-घर जागे देव, तुलसी-सालिग्राम का विवाह हुआ

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रेलवे रोड पर गन्ने बेंचता दुकानदार । - फोटो : ETAH
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एटा/कासगंज। देवोत्थान एकादशी का त्योहार आज घर-घर में मनाया गया। सुबह से ही त्योहार को लेकर घरों में चहल-पहल दिखाई दी। कोई गन्ना खरीद रहा था तो कोई सिंघाड़ा और शकरकंद। शाम को महिलाओं ने घरों में चौक सजाकर सामूहिक रूप से पूजन किया। तुलसी के पौधे को चौक पर रखकर शालिग्राम के साथ उनके विवाह की रस्म आदा की। इसके साथ ही घरों में मांगलिक कार्य आरंभ हो गए। देवोत्थान एकादशी को सभी 12 एकादशी में सबसे बड़ा माना जाता है।
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कारण इसी दिन वर्षाकाल के चार माह बाद देव जागते हैं और घरों में मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। महिलाओं ने त्योहार की तरह सुबह से ही घरों में झाडूू़-पौंछा कर घरों में गेरु और खड़िया से दीवारों पर सुंदर आकृतियां बनाईं और रंगोली सजाई गई। शाम महिलाओं ने घरों के आंगन में आटा और हल्दी से चौक बनाया और उस पर तुलसी के पौधे को रखकर शालिग्राम भगवान से उनके विवाह की रस्म अदा कराई। भगवान को गन्ना, शकरकंद और सिंघाड़ा का भोग लगाया और आरती उतारी।
कासगंज में देवोत्थान एकादशी पर बुधवार को घरों में गन्ने का मंडप बनाकर शालिग्राम और तुलसी का विवाह कराया गया। साथ ही रंगोली सजाकर देव (भगवान विष्णु) को शकरकंद, सिंघाड़े और मिठाई का भोग लगाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने देवताओं से घर में खुशहाली की कामना की।
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एकादशी पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। घरों मे सुबह से ही पर्व मनाने की तैयारियां शुरू हो गई। बाजार से पूजा के लिए सिंघाड़े, शकरकंद, गन्ना, फूल, बेर, मूली, गाजर सहित अन्य पूजा के समान की खरीदारी की। इस दौरान महिलाओं ने घर में रोली से चौक बनाकर गन्ने का मंडप बनाया। चौक के मध्य में शालिग्राम (भगवान विष्णु का चित्र) स्थापित कर माता तुलसी के साथ विवाह कराया गया। इस दौरान भगवान को गन्ना, सिंघाड़ा और फल-मिठाई समर्पित कर पूजा-अर्चना कर परिक्रमा लगाई। इस दौरान महिलाओं ने उपवास भी रखा। इस दौरान महिलाओं ने परंपरा के अनुसार देवों को जगाने के लिए लोक गीत गाकर परिवार की खुशहाली की कामना की।

बारात में डीजे पर थिरकते लोग ।संवाद- फोटो : ETAH

कासगंज में देवोत्थान पर्व पर एक घर में चौक सजाकर गन्ना आदि से की गई पूजा- फोटो : KASGANJ

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