भगवान विष्णु के तृतीय अवतार भगवान वराह के आज प्राकट्य दिवस पर तीर्थनगरी के क्षेत्राधीश भगवान वराह मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन दिन भर चलता रहा। सुबह भगवान वराह लक्ष्मी की मंगला आरती के बाद भगवान वराह का वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पंचाभिषेक किया गया। नवीन अंगवस्त्र धारण कराने के बाद यज्ञ अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़ कर आहुतियां डालीं। ऊं जय गंगे ऊं जय वाराह के जयकारों से मंदिर पूरे दिन गुंजायमान होता रहा। पूरे मंदिर परिसर को सुगंधित फूलों से सजाकर फूल बंगला का रूप दिया गया। भगवान वराह को 56 प्रकार के स्वादिष्ट व सुगंधित व्यंजनों का भोग लगाया गया। महाआरती उतारकर श्रद्धालुओं ने गुणगान किया। पूरे दिन प्रभु के दिव्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का मंदिर में तांता लगा रहा। रात्रि के समय जगराते का आयोजन किया गया। इसमें हारमोनियम ढोलक मजीरे की धुन पर श्रद्धालुओं ने आये प्रभु पृथ्वी को तारने धर वराह अवतार, गंगा मैया में जब तक ये पानी रहे, तीनों लोक से न्यारी नगरी ..आदि भजनों की माधुर्य सरिता देर रात तक बहती रही।
इस दौरान मंदिर महंत विदेहानंद गिरि, सुधांशु निर्भय, दिलीप दीक्षित, अनुपम शर्मा, दीपक निर्भय, उमाकांत बड़गैंयां, शिवेंद्र समाधिया, प्राण बल्लभ मिश्र, कन्हैया बौहरे, पंकज महेरे, सोनू दुबे आदि काफी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे।