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डग्गामार बसों से रोडवेज को प्रतिदिन दो से तीन लाख का नुकसान

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बस स्टैंड पर सवारी भर्ती रोडवेज कलर कि प्राइवेट बस ।संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। रोडवेज के रंग में रंगी डग्गामार बसों से सबसे ज्यादा राजस्व का नुकसान उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को उठाना पड़ रहा है। तीन साल पूर्व तक जिला यात्रियों से होने वाली आय के कारण प्रदेश के टॉप-5 जिलों में शुमार था, वहीं उसकी प्रतिदिन की आय 23 से 25 लाख रुपये प्रतिदिन की थी, जो घटकर एक समय सात से आठ लाख रुपये तक रह गई थी। नए एआरएम के आने पर इसमें बढ़ोत्तरी हुई है, पर जिला प्रदेश के टॉप-5 की जगह मंडल में भी दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। जबकि कासगंज पहले स्थान पर है।
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जिले में रोडवेज के रंग में रंगी डग्गामार बस संचालकों का कॉकस मजबूत है। इसके चलते रोडवेज को प्रतिदिन करीब दो से तीन लाख रुपये के राजस्व की हानि पहुंच रही है। दीपावली के बाद जब प्राइवेट बसें बंद थीं और केवल सरकारी बसें ही संचालित थीं उस समय 17 नवंबर को रोडवेज को एक ही दिन में 24 लाख 86 हजार 414 रुपये की आय हुई। इसके बाद से डग्गामार शुरू होते ही रोडवेज की आय निरंतर घटती चली गई है।
16-17 बसें हैं डग्गामार
एआरएम राजेश यादव ने बताया कि शहर में करीब 16-17 डग्गामार बसें रोडवेज के रंग में दिल्ली, फर्रुखाबाद, कासगंज और आगरा रोड पर दौड़ती हैं।
नहीं देते हैं टैक्स
एआरएम राजेश यादव ने बताया कि रोडवेज की बसें सरकारी होने के बाद भी टैक्स देती हैं, पर यह डग्गामार तो बिना टैक्स चुकाए ही दौड़ रही हैं। इन पर किसी विभागीय अधिकारी की नजर नहीं पड़ती है।
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रोडवेज के रंग में रंगी करीब 17 बसें प्रतिदिन विभिन्न मार्गों पर दौड़ती हैं, इनसे रोडवेज को प्रतिदिन दो से तीन लाख रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। हरियाणा में जिस तरह एआरएम को बसों को चालान करने का अधिकार है, यूपी में भी होता तो एक भी डग्गामार बस नहीं चल पाती। यहां डग्गामारों को सीज और चालान करने का अधिकार एआरटीओ और यातायात पुलिस पर है।
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राजेश यादव, एआरएम
28 दिसंबर को रोडवेज की आय:-17 लाख 81 हजार 354 रुपये
29 दिसंबर को रोडवेज की आय:-18 लाख 42 हजार 97 रुपये

बस स्टेंड से गुजरती रोडवेज कलर की प्राइवेट बस ।संवाद- फोटो : ETAH

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