एटा। झांसी मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में आग लगने से वहां 18 नवजात की मौत हो चुकी है। शासन ने मेडिकल कॉलेज सहित अन्य स्वास्थ्य इकाइयों पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए है, लेकिन जिले में इसके बाद भी लापरवाही बरती जा रही है। बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज में अग्निशमन इंतजाम देखने आई टीम को आग बुझाने के सिलिंडर खाली मिले। इसके अलावा मानक के अनुसार सिलिंडर भी नहीं थे।
झांसी के मेडिकल कॉलेज में घटना होने के बाद डीएम प्रेम रंजन सिंह ने डिप्टी कलक्टर भावना विमल, एसीएमओ डॉ. सुधीर मोहन सहित दमकल के अधिकारी को जिले में स्वास्थ्य इकाइयों की पड़ताल कर रिपोर्ट देने को कहा। बृहस्पतिवार को टीम मेडिकल कॉलेज के नए भवन में पहुंची। यहां टीम को भूतल पर दो सिलिंडर लगे मिले। दोनों ही सिलिंडर खाली थे। इसके बाद टीम भवन के अन्य तलों पर सिलिंडर को देखने गई।
अधिकारियों ने बताया मानक के अनुसार भवन में सिलिंंडर नहीं मिले। फायर अलार्म भी सही नहीं मिला। टीम ने पानी को चलवाकर देखा। बताया वहां एक हैंडल लगा होता है, वो नहीं था। इसके अलावा अन्य कई खामियां भी मिलीं। जिनको पूरा करने के निर्देश मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को दिए गए हैं। डिप्टी कलक्टर ने बताया जो सिलिंडर वहां लगे थे, उनमें से 20 प्रतिशत खाली थे।
एसएनसीयू भवन की नहीं एनओसी
मेडिकल कॉलेज प्रांगण में एमसीएच भवन बना है। इसमें द्वितीय तल पर एसएनसीयू संचालित है। यहां नवजात के लिए 12 वार्मर सहित 12 बेड सामान्य मरीजों के हैं। कॉलेज के अलावा बाहर के नवजात भी इसमें भर्ती किए जाते है, लेकिन भवन के पास दमकल विभाग की एनओसी ही नहीं है।
400 बेड का संचालित है मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज 400 बेड का संचालित है। नए भवन में मरीजों को भर्ती किए जाने की बात करें को द्वितीय तल से लेकर 5वें तल तक मरीजाें को यहां विभिन्न विभागों के वार्डों में भर्ती किया जाता है।
मेडिकल कॉलेज में आग बुझाने वाले कुछ सिलिंडर खाली मिले थे। इन्हें भरा रखने के लिए कहा गया है। स्प्रिंकलर को चालू हालत में कराने के निर्देश दिए गए हैं। - प्रशांत राणा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी