कासगंज। प्रथम अपर जिला सत्र न्यायाधीश नवनीत कुमार के न्यायालय ने गंजडुंडवारा क्षेत्र की एक छात्रा को अगवा करने के बाद दुष्कर्म के दोषी को दस साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जिसमें से 30 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।
घटना 26 जुलाई 2017 की है। छात्रा को उसका पड़ोस का युवक मोतीलाल का उसके घर पर आना जाता था। वह उसे अगवा कर ले गया। इस मामले में छात्रा के पिता ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने छात्रा को 30 जुलाई को बस स्टेंड से आरोपी के पास से बरामद कर लिया। पुलिस ने दोषी को जेल भेज दिया। जबकि छात्रा का चिकित्सीय परीक्षण कराकर उसके बयान दर्ज किए। अपने बयानों में छात्रा ने आरोप लगाया कि वह स्कूल जा रही थी तभी उसे वह बाइक पर बिठाकर अगवा कर ले गया। और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने कोर्ट में चार्जसीट दाखिल कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल कुमार ने मामे की पैरवी की। उन्होंने कोर्ट में छात्रा सहित नौ गवाह पेश किए। कोर्ट ने दोषी को दोषी माना। कोर्ट ने 41 पेज के अपने जजमेंट में दोषी को धारा 363 के तहत 3 साल की सजा वे 5 हजार रुपये जुर्माना, धारा 366 के तहत 3 साल की सजा व 5 हजार रुपये जुर्माना, धारा 376 के तहत 10 साल की सजा तथा 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने में से 30 हजार रुपये की धनराशि पीड़िता को देने के आदेश जारी किए गए हैं।
ढाई साल की बच्ची के दुष्कर्मी को आजीवन कारावास
ेएटा। पांच साल पहले मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपित को अपर सत्र न्यायाधीश पॉस्को एक्ट ने सुनवाई और साक्ष्यों के बाद पांच साल की सजा सुनाई है। न्यायाधीश की ओर से 50 हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
थाना कोतवाली देहात में पॉस्को एक्ट के तहत सात जुलाई 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोपी सोनपाल पुत्र किशोरी लाल निवासी गांव कुसाड़ी देहात पर आरोप था कि ढाई साल की मासूम को खेलते समय उठा ले जाने के बाद दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस मामले की सुनवाई न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक और विशेष न्यायाधीश पॉस्को एक्ट अशोक कुमार द्वारा की गई। इस मामले में पीड़िता का भी बयान दर्ज किया गया था। जब पीड़िता साढ़े तीन साल की थी तब उसने अपने साथ हुई पूरी वारदात को अदालत में बताया। न्यायाधीश ने बच्ची के बयान और सबूतों के आधार पर आरोपी सोनपाल पुत्र किशोरी लाल को आजीवन कारावास की सजा और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। इस मामले की पैरवी विशेष अधिवक्ता संतोष कुमार विशेष लोक अभियोजन की ओर से की गई।