एटा। योग निरोगी काया का परिचायक है। योग से असाध्य रोग भी दूर हो रहे हैं। ऋषि मुनियों की हजारों वर्ष पुरानी योग पद्धति को पूरे विश्व ने स्वीकार किया है। कोरोना के संक्रमण काल में इसकी अहमियत और बढ़ी है। योग और प्राणायाम प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में लाभकारी हैं। योगाचार्य और योग प्रशिक्षक बताते हैं कि नियमित योग करने से मनुष्य अपने दिमाग पर नियंत्रण रख सकता है। मन में दुख, क्रोध, अवसाद, घृणा इत्यादि के भावों के साथ नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी होने से रोक सकता है। डायविटीज, थायराइड, हड्डी, दर्द समेत कई असाध्य रोगों का उपचार भी योग से संभव है। जिले में ऐसे सैकड़ों लोग हैं जिन्हाेंने योग के जरिए कई गंभीर बीमारियों पर जीत हासिल की है। आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर ऐसे ही लोगाें ने अनुभव प्रस्तुत हैं।
पैरालाइज से स्वस्थ होने तक का सफर अलीगंज के पूर्व प्रधानाचार्य रामनारायण सिंह यादव ने अपने जीवन का प्रेरणादायक अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2016 में उन्हें पैरालाइज अटैक पड़ा था। इलाज के लिए कई अस्पतालों और चिकित्सकों का सहारा लिया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। लगातार प्रयासों के बावजूद जब स्वास्थ्य में विशेष सुधार नहीं हुआ तो उन्होंने योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। अनुलोम-विलोम सहित विभिन्न योग क्रियाओं को प्रतिदिन अपनाया और अनुशासित जीवनशैली बनाए रखी। निरंतर अभ्यास का परिणाम रहा कि धीरे-धीरे वह स्वस्थ हो गए। आज वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और प्रतिदिन करीब एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल टहलते हैं।
थायरॉयड और नसों की सूजन से मिली राहत
जलेसर निवासी अंजना गोयल की मानें तो पिछले कई सालों से थायरॉयड और वेरिकोज वेंस (नसों की सूजन) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। मोटापा भी लगातार बढ़ रहा था। महंगी दवाइयां खाने के बाद भी मुझे कोई आराम नहीं मिल रहा था। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, जलेसर के योग प्रशिक्षक ने कुछ जरूरी व्यायाम बताए। नियमित योग करने से वजन भी कम हुआ है। मुझे थाॅयराइड व वेरिकोज वेंस की समस्या में आराम मिला है।
चमत्कारी है योग की शक्ति : सही मार्गदर्शन से असाध्य रोगों पर पाई जा सकती है विजय
जलेसर के हिमांशु गोयल बताते हैं कि जहां लोग छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए दवाओं के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं, वहीं राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय से योग का प्रशिक्षण लेकर बड़ा फायदा हुआ है। कमर से लेकर पैर तक गंभीर दर्द और नसों के खिंचाव से परेशान था। योग के बल पर खुद को पूरी तरह स्वस्थ किया है।
योग से सांस नली की बीमारी ठीक की
मिरहची के योगाचार्य रामनरेश शाक्य ने बताया कि वह बचपन से ही सूर्य नमस्कार करते रहे हैं। 10 वर्ष पहले जब मुझे श्वास नली से संबंधित बीमारी हुई। तीन माह तक कपाल भांति, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, वज्रासन से बीमारी पर विजय पायी। योग में ही मास्टर डिग्री की। अब वह खुद लोगों को प्रशिक्षण देकर स्वस्थ होने बना रहे हैं।
रामनारायण सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य
रामनारायण सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य
रामनारायण सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य