एटा। कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन ने जूनियर अधिवक्ताओं और मुंशियों के लिए नया ड्रेस कोड एक अप्रैल से लागू कर दिया है। अब न्यायालय परिसर में निर्धारित वेशभूषा का पालन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। बार ने इसके लिए एक विशेष निगरानी टीम भी गठित की है जो सिविल कोर्ट, दीवानी न्यायालय व कलेक्ट्रेट परिसर में लगातार भ्रमण कर नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी।
बार पदाधिकारियों के कहा कि पिछले कुछ समय से यह शिकायत मिल रही थी कि जूनियर अधिवक्ता व कई मुंशी बिना तय वेशभूषा के ही परिसर में आते-जाते हैं। जिससे न्यायिक वातावरण की अनुशासनात्मक गरिमा प्रभावित हो रही है। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया। जिसे पूर्व में 23 सदस्यों ने सर्वसम्मति से बार बैठक में पास करते हुए एक अप्रैल से लागू किया गया।
जूनियर अधिवक्ताओं को काली पैंट, सफेद शर्ट व काली टाई पहनना अनिवार्य किया गया है। वहीं मुंशियों के लिए नीली शर्ट व नीली पैंट अनिवार्य वर्दी के रूप में निर्धारित की गई है। बार ने कहा है कि यह व्यवस्था न्यायालय परिसर की गरिमा बढ़ाने और कार्यप्रणाली को अनुशासित रखने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। बार ने गठित निरीक्षण टीम में अजीत चौहान, अभिषेक शर्मा, अभिषेक पाराशर, मनीष शर्मा, मोना गुप्ता और जगन वार्ष्णेय को शामिल किया गया है।
यह टीम समय-समय पर न्यायालय परिसर का दौरा कर ड्रेस कोड का उल्लंघन करने वालों की पहचान करेगी और 2000 हजार का जुर्माना व मौके पर ही उन्हें सख्त चेतावनी दी जाएगी। टीम को यह भी निर्देशित किया गया है कि बार के आदेशों का पालन न करने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रस्तावित की जा सकती है।