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मौसम की बेरुखी से वूलेन बाजार पड़े ठंडे

Mon, 08 Dec 2014 11:58 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
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मौसम की बेरुखी से वूलेन बाजार ठंडे पड़े हैं। कारोबारियों का कहना है कि करोड़ों रुपये के गर्म कपड़ों का माल गोदामों में कैद है। मांग न होने के चलते यह शोरूम तक नहंी पहुंच रहा।
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दिसंबर में अक्तूबर जैसा मौसम लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि एक सप्ताह पूर्व तापमान में कुछ गिरावट जरूर आई थी, मगर उसके बाद फिर तापमान बढ़ने से ठंड का अहसास नहीं हो रहा। मौसम की बेरुखी कारोबारियों पर भी भारी पड़ रही है। वूलेन कारोबारी से लेकर सर्दी का अन्य सामान बेचने वाले परेशान हैं।



 इनका कहना है कि दीपावली पर ही आ गया करोड़ाें का माल अभी तक गोदामों में कैद है। ठंड न पड़ने से इनकी मांग नहीं बढ़ रही। मफलर, कोट, जैकेट तो दूर लोग अभी तक इनर से ही काम चला रहे हैं। हीटर, ब्लोअर तो दूर कार्यालयों में दोपहर के समय पंखे चल रहे हैं। बता दें कि पिछले वर्ष दिसंबर के प्रथम सप्ताह में तापमान 16 डिग्री सेल्सियस के पास था, जबकि इस बार 23 डिग्री के लगभग तापमान चल रहा है।
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कारोबारियों के अनुसार शहर के विक्रेताओं के पास 20 करोड़ का वूलेन जमा है। इतने का ही आर्डर बुक हैं। मांग न बढ़ने से वे नया माल नहीं मंगा पा रहे। 20 दिन के क्रेडिट पर आने वाले माल का पेमेंट न होने से कंपनियां भी दबाव बना रही हैं।

सहालग के दिनों में ठंड से कारोबार अच्छा रहता है। सीमित सहालग ऊपर से मौसम की बेरुखी से कारोबारी परेशान हैं। जुलाई अगस्त में ही दिए गए वूलेन आर्डर से करोड़ों का माल शहर में है। शेष को डिलीवरी का इंतजार है। मांग न होने से सब कुछ ठंडा है। स्थानीय विक्रेता एवं कंपनियां भी परेशान हैं। डेढ़ दशक के कारोबार में मौसम की ऐसी बेरुखी पहली बार है।
- मोहित गुप्ता, रेडीमेड गारमेंट कारोबारी

गत वर्ष की तुलना में इस बार आधी विक्री भी नहीं हो रही। सहालग खत्म होने के बाद तो और भी बुरा हाल है। फैशन के दौर में पुराने माल की मांग नहीं रहती। ऐसे में अभी तक वूलन कारोबार मायूसी भरा रहा।
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- विकास जैन, रेडीमेड गारमेंट कारोबारी

पंद्रह जनवरी के बाद बड़े शहरों में वूलेन सेल शुरू हो जाती है। इसके साथ ही स्तरीय लोग स्थानीय बाजारों में नहीं आते। और ब्रांडेड माल नहंी बिक पाता।
- संजय भसीन, रेडीमेड गारमेंट कारोबारी
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