एटा। हथठेल पर लेकर मरीज काे उसके परिजन 1 जनवरी को मेडिकल कॉलेज लाए थे। वहां मरीज का मृत बता दिया गया। आरोप था कि एंबुलेंस नहीं पहुंची और लोकेशन न मिलने की बात कही गई। मामले में सीएमओ ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। लखनऊ से जीपीएस की लोकेशन सहित कॉल डिटेल मंगाई गई। जांच के बाद ईएमटी व एंबुलेंस के चालक को क्लीन चिट दे दी गई है।
शहर के मोहल्ला पटियाली गेट निवासी अमन ने आरोप लगाया था कि उसके पिता पप्पू सोमवार को अचानक घर में गिर गए। एंबुलेंस के लिए तीन बार कॉल की लेकिन वह नहीं आई। बाद में उन्हें हथठेल से लेकर आए थे और उनकी मौत हो गई। मामले में प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए सीएमओ ने चालक व ईएमटी को ड्यूटी से हटा दिया था। उन्होंने एसीएमओ डॉ. राममोहन तिवारी, डिप्टी सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र नागर सहित वाहन प्रभारी लोकमन सिंह को शामिल कर जांच कमेटी बनाई।
जांच टीम ने लखनऊ से कॉल डिटेल निकलवाई। वहीं जीपीएस की लोकेशन मंगाई। कॉल डिटेल में आया कि दो बार कॉल की गई। एक बार कॉल पर 59 सेकेंड बात हुई। सीएमओ ने बताया कॉल आने पर एंबुलेंस मौके पर गई। मरीज के परिजन कॉल के तुरंत बाद मरीज को ले आए। एंबुलेंस मौके पर पहुंची और ईएमटी ने बात की तो बताया गया कि कॉलेज में मरीज को लेकर पहुंच रहे हैं। जबकि मरीज को लेने एंबुलेंस समय पर पहुंची थी। इसी के चलते ईएमटी व एंबुलेंस के चालक को क्लीन चिट दी गई है।