इन दिनों ग्राम्य विकास विभाग (डीआरडीए) के कर्मचारी शासन से उधारी लेकर नौकरी कर रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों को केंद्र सरकार से लड़ झगड़कर मई 2014 तक का वेतन मुश्किल से प्राप्त हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार जून-जुलाई का वेतन कर्मचारियों द्वारा हड़ताल करने पर विभाग को उधार के रूप में दिया था। इसमें शर्त थी कि जब केंद्र से विभाग को वेतन आएगा तब यह धनराशि काट ली जाएगी।
अब केंद्र सरकार से विभाग को 40 लाख का बजट आएगा तो 20 लाख रुपये राज्य सरकार उसमें से अपनी उधारी काट लेगी। इससे विभाग के पास सिर्फ 20 लाख रुपये ही बचेंगे, जिससे बमुश्किल सितंबर तक का ही काम चल सकेगा। यहां गौर करने वाली यह भी बात है कि इस बजट के बाद मार्च 2015 तक कोई बजट नहीं आएगा। इसके चलते कर्मचारियों को अक्तूबर से मार्च तक वेतन के लाले पड़ने तय है।
यह उस विभाग के कर्मचारियों की कहानी है जिनके दम पर जिले में विकास कार्य अपने अंजाम तक पहुंचता है, लेकिन आज हालात इससे इतर हैं। कर्मचारियों को जुलाई से वेतन न मिल पाने के चलते अब उन्हें परिवार चलाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। हालात तो अब यह हो गए हैं कि दिल्ली बैठे कर्मचारियों के सरकारी दूरभाष के नंबर भी नहीं लगते। इससे कर्मचारियों को कम से कम तसल्ली मिल जाए कि उनका वेतन कब तक आ जाएगा।
विभाग की मानें तो उसने शासन से 20 लाख रुपये उधार ले रखा है। विभाग में परियोजना निदेशक (पीडी) सहित कुल 20 कर्मचारी हैं। इन सभी का कुल मासिक वेतन 11 लाख के आसपास बैठता है। सरकार की लापरवाही की हद तो यह है कि वेतन की यह समस्या पिछले काफी समय से चली आ रही है, लेकिन काई उचित समाधान अब तक नहीं निकला है।
ये है डीआरडीए का बजट
डीआरडीए विभाग पर कुल खर्च होने वाले बजट में 80 प्रतिशत केंद्र सरकार का और 20 प्रतिशत राज्य सरकार का होता है। इसी के चलते शासन ने विभाग को 20 लाख रुपये अपनी ओर से दिए थे कि जब केंद्र से बजट आएगा तब वह अपनी धनराशि उसमें काट लेगा।
ये आ रही परेशानी
केंद्र व राज्य में आपसी तालमेल न होने की वजह से यह परेशानी आ रही है। राज्य सरकार का तर्क है कि विभाग भारत सरकार का है तो वेतन भी भारत सरकार को उपलब्ध कराना चाहिए। विभाग राज्य की जो योजनाएं देख रहा है, उसका सरकार की ओर से 20 प्रतिशत वेतन भी दिया जा रहा है। दूसरी ओर केंद्र सरकार इस विभाग को पूर्ण रूप से राज्य के हवाले करने की फिराक में है, लेकिन बात नहीं बन पा रही है। केंद्र सरकार का तर्क है कि डीआरडीए केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार की भी कई योजनाएं देख रहा है।
डीआरडीए द्वारा संचालित योजनाएं
- सांसद निधि
- विधायक निधि
- इंदिरा आवास
- लोहिया आवास
- मनरेगा
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)
डीआरडीए कर्मचारियों को अगस्त माह से वेतन नहीं मिला है। इससे पूर्व दो माह का वेतन शासन ने उधार के तौर पर कर्मचारियों को दिया है। इससे विभागीय कर्मचारियों को परेशानी आ रही है। आने वाले दिनों में भी वेतन की समस्या से जूझना पड़ेगा।
- केके वैश्य, परियोजना निदेशक, एटा