एटा। जिले की दो ऐसी नगर पालिकाएं हैं, जहां 2017 में सत्तासीन भाजपा को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। यहां इस बार के चुनाव में केसरिया ध्वज फहराने को भाजपा बेताब है। हालांकि दो नगर पंचायतों में भी पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा था, लेकिन इन दोनों के ही निर्वाचित अध्यक्षों के भाजपा में शामिल होने से मजबूती बढ़ गई है।वर्ष 2017 में ही प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी। इसके बाद उसी साल अंत में नगर निकायों का चुनाव भी कराया गया। प्रदेश की सत्ता में आने के बाद राजनीति में भाजपा का दबदबा था और निकाय चुनाव पर भी इसका पूरा असर देखने को मिला। उस समय जिले में कुल मिलाकर नौ नगर निकाय थे। इनमें से पांच पर भाजपा का कब्जा हुआ, लेकिन टीस चार निकायों पर रही थी।
इनमें से अवागढ़ नगर पंचायत में टिकट न मिलने पर निर्दलीय के रूप में लड़े महेशपाल ने भाजपा प्रत्याशी को पटकनी दी थी। बाद में वह भाजपा में ही शामिल हो गए। जबकि मारहरा और एटा नगर पालिका में सपा के प्रत्याशी जीते। सकीट नगर पंचायत पर सपा की डॉ. किरन सिंह के खाते में जीत आई। यह भी पिछले साल भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में अब एटा और मारहरा नगर पालिका पर पार्टी की सबसे अधिक नजर है। भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप जैन ने कहा कि पार्टी की सभी सीटें समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। सभी पर मजबूत प्रत्याशी उतारकर चुनाव लड़ा जाएगा।
यह था 2017 का चुनाव परिणाम
निकाय विजेता पराजित
एटा - मीरा गांधी (निर्दलीय) - शालिनी गुप्ता (भाजपा)
मारहरा - परवेज जुबैरी (सपा) - गौरव गुप्ता (भाजपा)
अलीगंज - ब्रजेश गुप्ता (भाजपा) - हुमैरा बेगम (बसपा)
जलेसर - विकास मित्तल (भाजपा) - मोहन सिंह हैप्पी (पीस पार्टी)
सकीट - डॉ. किरन सिंह (सपा) - मुकेश चंद्र (भाजपा)
अवागढ़ - महेशपाल सिंह (निर्दलीय) - जय सिंह (भाजपा)
जैथरा - विजेंद्र सिंह चौहान (भाजपा) - विनोद कुमार (सपा)
राजा का रामपुर - महावीर सिंह (भाजपा) - भूपेंद्र सिंह (निर्दलीय)
निधौली कलां - देवलाल लोधी (भाजपा) - सोमेश बाबू (सपा)